संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने ‘संविधान मेला’ की राष्ट्रव्यापी पहल, रायपुर से शुरू हुई श्रृंखला…

रायपुर। विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के पास दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संविधानों में से एक होने के बावजूद आम नागरिकों तक उसकी सही जानकारी और उसका समुचित पालन नहीं पहुंच पा रहा है। इसी चिंता को लेकर भारतीय संविधान प्रचारणी सभा, भारत ने देशभर में संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राष्ट्रव्यापी “संविधान मेला” आयोजित करने की पहल की है। संस्था का मानना है कि जब तक आम नागरिकों को संविधान के अधिकारों, कर्तव्यों और उसके प्रावधानों की सही जानकारी नहीं होगी, तब तक लोकतंत्र की असली ताकत समाज तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाएगी।

सभा के तत्वावधान में नवंबर 2026 तक दो और तीन दिवसीय 12 संविधान मेलों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इस अभियान की शुरुआत 20 और 21 मार्च 2026 को रायपुर के विमतारा सभा भवन में आयोजित संविधान मेला से हुई। इसके बाद 28 और 29 मार्च को अजमेर के बुद्ध ज्योति विहार, 13 और 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जन्मस्थली महू, 18 से 20 अप्रैल को खरसिया (जिला रायगढ़), 1 और 2 मई को चिरमिरी (एमसीबी), 8 से 10 मई को सारंगढ़ (जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़) और 28 व 29 अगस्त को लांजी (जिला बालाघाट) में संविधान मेले का आयोजन प्रस्तावित है।

संस्था के अनुसार यह अभियान पूरी तरह संवैधानिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए है और इसका किसी भी धर्म, जाति या संप्रदाय से कोई संबंध नहीं है। “100-100 रुपये में संविधान मेला योजना” के तहत संविधान समर्थकों के मासिक सहयोग से इस कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। संस्था का दावा है कि देश में यदि तीन हजार संविधान समर्थक भी इस अभियान से जुड़ जाएं तो पूरे देश में इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए जा सकते हैं।

तीन दिवसीय संविधान मेले के दौरान रोज सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें संविधान प्रदर्शनी, चलित संविधान पाठशाला, सामूहिक संविधान पठन, संविधान संदेश अभियान, विशेषज्ञों के व्याख्यान, निबंध और भाषण प्रतियोगिता, प्रश्न मंच, संविधान ज्ञान परीक्षा, नाटक मंचन, जन-संसद तथा संविधान गीत-संगीत प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। संविधान विशेषज्ञों द्वारा अधिकारों, कर्तव्यों, नीति निर्देशक तत्वों और विभिन्न अनुच्छेदों की विस्तृत व्याख्या भी की जाती है, ताकि आम लोगों में संवैधानिक समझ विकसित हो सके।

भारतीय संविधान प्रचारणी सभा का मानना है कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों की आधारशिला है। ऐसे में समाज के हर वर्ग तक संविधान की जानकारी पहुंचाने और उसके प्रति सम्मान का भाव विकसित करने के लिए इस तरह के आयोजन बेहद आवश्यक और सराहनीय पहल माने जा रहे हैं। संस्था ने देशभर के संविधान समर्थकों से इस अभियान में सहयोग और सहभागिता की अपील भी की है।

इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ प्रदेश सहित मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र के सदस्यगण भी शामिल हुए। कार्यक्रम का सफल संचालन संविधान प्रचारिणी सभा के सदस्य माननीय सुनील भारद्वाज, शंकर कुंजाम और विनोद कुमार कोशले द्वारा किया गया।

संविधान प्रचारिणी सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट धनीराम बंजारे ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन समाज में संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया तथा सभी के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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