Maa Katyayani Puja : चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया जा रहा है और आज नवरात्रि का छठा दिन है। आज का दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप ‘मां कात्यायनी’ को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त सच्चे मन से मां कात्यायनी की आराधना करते हैं, उनके जीवन से डर, रोग और शोक का नाश होता है। मां का स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है; वे स्वर्ण के समान चमकीली हैं और सिंह पर सवार होकर भक्तों को अभय प्रदान करती हैं।
कैसा है मां का स्वरूप? मां कात्यायनी की चार भुजाएं हैं। उनके दाहिने हाथ अभय और वरद मुद्रा में रहते हैं, जो भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। वहीं, उनके बाएं हाथों में तलवार और कमल का फूल सुशोभित है। उन्हें शक्ति और साहस की देवी माना जाता है।
पूजा की सरल विधि आज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। मां को रोली, अक्षत, धूप और पीले फूल अर्पित करें। अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें और अंत में मां की आरती कर प्रसाद बांटें।
शहद का भोग और लाल रंग का महत्व मां कात्यायनी को शहद बहुत प्रिय है, इसलिए आज उन्हें शहद या शहद से बनी खीर का भोग लगाना विशेष फलदायी माना जाता है। रंग की बात करें तो आज के दिन लाल रंग के कपड़े पहनना बेहद शुभ है, क्योंकि यह रंग साहस और शक्ति को दर्शाता है।
ऋषि कात्यायन की पुत्री बनीं जगदम्बा पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने मां भगवती को पुत्री के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर जन्म लिया, जिसके कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। जब महिषासुर का अत्याचार बढ़ गया, तब मां कात्यायनी ने ही उस पापी राक्षस का वध कर देवताओं को भयमुक्त किया था। इसी वजह से उन्हें ‘महिषासुरमर्दिनी’ भी कहा जाता है।
मां कात्यायनी का मंत्र चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥