अनूपपुर। मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। प्रोफेसर डॉ. चार्ल्स वर्गीज पर हुए हमले के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 11 शोध छात्रों को संस्थान से निष्कासित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद कैंपस में हड़कंप मच गया है और मामला अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है।
विवाद की मुख्य वजह छात्रावास आवंटन को लेकर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, पूर्व वार्डन को हटाए जाने के बाद डॉ. वर्गीज को नई जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने नियमों के तहत हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए, जिससे छात्रों का एक गुट नाराज हो गया। आरोप है कि इसी रंजिश के चलते 19 मार्च की रात प्रोफेसर के आवास पर हमला किया गया। घटना के विरोध में विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने मोर्चा खोल दिया और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी रजनीश त्रिपाठी ने बताया कि शोध छात्रों ने उस आवासीय क्षेत्र की घेराबंदी कर तालाबंदी कर दी थी, जहां शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारी रहते हैं। अनुशासनहीनता और सुरक्षा में सेंध लगाने के गंभीर आरोप में इन 11 छात्रों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की गई है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने अमरकंटक थाने को पत्र लिखकर संबंधित छात्रों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
इस घटनाक्रम ने अब राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। केरल से राज्यसभा सांसद डॉ. वी. सिवदासन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हमले की निंदा की है और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। दूसरी ओर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इस मामले में संगठन की किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इनकार किया है और इसे छवि खराब करने की साजिश बताया है। फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है, लेकिन एहतियात के तौर पर कैंपस में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।