खुशियों और भाईचारे का त्योहार ईद-उल-फितर आज दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में दस्तक दे चुका है। जहां एक तरफ पूरा देश कल यानी 21 मार्च को ईद मनाने की तैयारी कर रहा है, वहीं केरल और तमिलनाडु में आज ही ईद का जश्न शुरू हो गया है। आखिर ऐसा क्यों है कि एक ही देश में दो अलग-अलग दिनों पर ईद मनाई जा रही है? आइए समझते हैं इस खगोलीय और धार्मिक तालमेल को।
चांद के दीदार ने बदला फैसला
इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, ईद का त्योहार शव्वाल महीने की पहली तारीख को मनाया जाता है, जो पूरी तरह चांद दिखने पर निर्भर करता है।
केरल और तमिलनाडु का हाल: 19 मार्च (गुरुवार) की शाम को केरल के चेट्टीप्पाडी (परप्पनंगडी) में शव्वाल का चांद स्पष्ट रूप से देखा गया। स्थानीय उलेमाओं और मौलवियों द्वारा चांद की पुष्टि होने के बाद, इन राज्यों में आज यानी 20 मार्च को ईद मनाने का ऐलान कर दिया गया।
बाकी भारत की स्थिति: देश के अन्य हिस्सों में 19 मार्च को चांद नजर नहीं आया। चूंकि सऊदी अरब और खाड़ी देशों में कल चांद देखा गया था, इसलिए वहां आज ईद है। आमतौर पर भारत के बाकी हिस्सों में खाड़ी देशों के एक दिन बाद ईद मनाई जाती है, इसीलिए उत्तर और मध्य भारत में कल ईद मनाई जाएगी।
ऐतिहासिक महत्व और परंपरा
ईद-उल-फितर की परंपरा सदियों पुरानी है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत साल 624 ईस्वी में पैगंबर हजरत मुहम्मद ने मदीना में की थी। यह वह समय था जब मुसलमानों ने हिजरत के बाद अपना पहला रमजान मुकम्मल किया था। पैगंबर साहब ने ही मुसलमानों के लिए खुशियों के दो खास दिन मुकर्रर किए थे— ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा।
महत्व: ‘ईद’ का अर्थ है उत्सव और ‘फितर’ का संबंध रोजा खोलने से है। यह दिन अल्लाह का शुक्रिया अदा करने का है, जिन्होंने बंदों को महीने भर के कठिन रोजे रखने की शक्ति दी।