आज 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि का मंगलमय प्रारंभ हो चुका है। हिंदू नववर्ष के स्वागत के साथ ही भक्त मां दुर्गा की भक्ति में लीन हैं। शास्त्रों में मां भगवती को प्रसन्न करने के लिए ‘दुर्गा सप्तशती’ के पाठ को अमोघ अस्त्र माना गया है। मार्कण्डेय पुराण का यह हिस्सा केवल मंत्रों का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन की हर बाधा को काटने वाली एक आध्यात्मिक शक्ति है।
700 श्लोकों में छिपा है विजय का सार
दुर्गा सप्तशती को ‘देवी महात्म्य’ भी कहा जाता है। इसमें कुल 13 अध्याय और 700 श्लोक हैं, जो मां काली, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की महिमा का गुणगान करते हैं। मान्यता है कि इन 13 अध्यायों में असुरों पर देवी की विजय की जो गाथा है, वह असल में मनुष्य के भीतर के विकारों (काम, क्रोध, लोभ) पर विजय पाने का मार्ग है।
समस्या एक, समाधान अनेक: किस अध्याय से क्या मिलता है फल?
ज्योतिष और धार्मिक विद्वानों के अनुसार, सप्तशती का हर अध्याय विशेष फल देने वाला है:
आर्थिक तंगी और दरिद्रता: जो लोग कर्ज या धन की कमी से जूझ रहे हैं, उनके लिए 13वां अध्याय चमत्कारी माना जाता है।
बीमारी और सेहत: असाध्य रोगों और शारीरिक कष्टों से मुक्ति के लिए 11वें अध्याय का श्रद्धापूर्वक पाठ करना चाहिए।
शत्रु और भय: यदि जीवन में अनजाना डर या विरोधियों का दबाव है, तो 4थे और 5वें अध्याय का पाठ बल और आत्मविश्वास प्रदान करता है।
पाठ की सही विधि: कवच, अर्गला और कीलक का महत्व
अक्सर लोग सीधे अध्यायों का पाठ शुरू कर देते हैं, लेकिन नियम कहते हैं कि पाठ से पहले कवच, अर्गला और कीलक का पाठ अनिवार्य है। यह पाठक के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनाता है और मंत्रों को ‘कीलित’ (सिद्ध) करने में मदद करता है। नवरात्रि के दौरान यदि कोई व्यक्ति पूरे 9 दिन में इसे क्रमवार तरीके से पूरा करता है, तो उसके घर से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
सफलता के लिए इन बातों का रखें ध्यान
शुद्धता: स्नान के बाद लाल या पीले वस्त्र धारण कर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
अखंड ज्योति: पाठ के समय घी का दीपक जलते रहना चाहिए।
स्पष्ट उच्चारण: श्लोकों का उच्चारण धीमे और स्पष्ट स्वर में करें, जल्दबाजी न करें।
पूर्णता: पाठ के अंत में ‘सिद्ध कुंजिका स्तोत्र’ या क्षमा प्रार्थना जरूर करें ताकि अनजाने में हुई गलती का दोष न लगे।