19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो रहा है। नौ दिनों तक चलने वाली इस श्रद्धा की लहर में लाखों भक्त मां दुर्गा की उपासना के साथ उपवास (व्रत) रखेंगे। धार्मिक दृष्टि से व्रत जहां मन की शुद्धि का माध्यम है, वहीं आयुर्वेद और विज्ञान इसे शरीर को ‘डिटॉक्स’ करने का बेहतरीन तरीका मानते हैं। हालांकि, जानकारी के अभाव में अक्सर लोग व्रत के दौरान खान-पान में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो फायदे की जगह सेहत को भारी नुकसान पहुँचा सकती हैं।
- घंटों खाली पेट रहना: कमजोरी को बुलावा
कई श्रद्धालु पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए रहते हैं। लंबे समय तक भूखा रहने से शरीर का शुगर लेवल गिर सकता है, जिससे चक्कर आना, सिरदर्द और गंभीर एसिडिटी हो सकती है।
बचाव: हर 2-3 घंटे में मखाना, फल या हल्के स्नैक्स लेते रहें ताकि एनर्जी बनी रहे।
- व्रत के नाम पर ‘ऑयली फूड’ की दावत
अक्सर देखा जाता है कि व्रत में लोग कुट्टू की पूड़ी, सिंघाड़े के पकौड़े और साबूदाने के वड़े जैसे तल-भुने पकवानों का ज्यादा सेवन करते हैं। खाली पेट इतना भारी और तेल वाला खाना सीधे लीवर और पाचन तंत्र पर हमला करता है।
बचाव: तली चीजों के बजाय उबले हुए आलू, दही, या भुने हुए मेवे खाएं।
- पानी से दूरी: डिहाइड्रेशन का खतरा
काम की व्यस्तता या आलस में लोग व्रत के दौरान पानी पीना कम कर देते हैं। इससे शरीर में टॉक्सिन्स (गंदगी) जमा होने लगते हैं और डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है।
बचाव: सादे पानी के अलावा नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी का सेवन बढ़ाएं।
- मीठे और हाई कैलोरी का ओवरडोज
चीनी वाली चाय, हलवा और ज्यादा मीठे फलों के सेवन से अचानक वजन बढ़ सकता है और आलस घेर लेता है।
बचाव: रिफाइंड शुगर की जगह प्राकृतिक मिठास वाले फल (जैसे सेब, पपीता) खाएं।
- व्रत खोलते समय ‘ओवरईटिंग’
दिनभर भूखा रहने के बाद शाम को एक साथ भारी भोजन करना पाचन बिगाड़ सकता है। इससे पेट फूलने और भारीपन की समस्या होती है।
बचाव: व्रत हमेशा हल्का आहार या तरल पदार्थ लेकर खोलें और धीरे-धीरे खाएं।