छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां कुत्ते के काटने के बाद सही इलाज न कराने के कारण एक युवक की जान चली गई। बताया जा रहा है कि परिवार ने मेडिकल उपचार की बजाय जड़ी-बूटी पर भरोसा किया, जिसका खामियाजा युवक को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, बलरामपुर जिले के महाराजगंज गांव निवासी 35 वर्षीय रामजीत राम को करीब पांच महीने पहले एक कुत्ते ने काट लिया था। घटना के बाद परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने के बजाय गांव में ही पारंपरिक जड़ी-बूटी से इलाज कराना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद घाव भर जाने पर परिवार को लगा कि वह पूरी तरह ठीक हो चुका है।
हालांकि, बीते रविवार को रामजीत की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे तेज बुखार, शरीर में अकड़न और असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण दिखाई देने लगे। परिजनों के अनुसार, वह कुत्तों जैसी हरकतें भी करने लगा था, जिसके बाद उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया।
प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान रविवार रात उसकी मौत हो गई।
चिकित्सकों का मानना है कि यह मामला रेबीज संक्रमण का है, जो समय पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन न लगने के कारण जानलेवा साबित हुआ। यह घटना एक बार फिर जागरूकता की कमी और अंधविश्वास के खतरनाक परिणामों को उजागर करती है।
विशेषज्ञों की सलाह:
कुत्ते या किसी भी जानवर के काटने पर तुरंत घाव को साफ करें और बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में एंटी-रेबीज टीका लगवाएं। रेबीज एक घातक बीमारी है, जिसका समय पर इलाज ही बचाव का एकमात्र उपाय है