बचेली –
एनएमडीसी बीआईओएम बचेली काम्प्लेक्स में एक से अधिक यूनियन की सदस्यता फार्म भरने वाले कुल 96 कर्मचारियों के सदस्यता सत्यापन के लिए प्रबंधन ने दिनांक 17 एवं 18 मार्च को दो चरणों में कर्मचारियों को बुलाया है। यूनियनों के बीच सदस्यता को लेकर चल रही खींचतान के बीच इस प्रक्रिया को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इन 96 कर्मचारियों में 15 नए भर्ती ट्रेनी शामिल हैं, जिनसे नियुक्ति से पहले मेडिकल के दौरान ही दोनों यूनियनों द्वारा सदस्यता फॉर्म भरवा लिया गया था। असली विवाद शेष 81 पुराने कर्मचारियों की सदस्यता को लेकर है। इन 81 कर्मचारियों में से 68 कर्मचारी पिछले वर्ष संयुक्त खदान मजदूर संघ (एटक) तथा 13 कर्मचारी मेटल माइंस वर्कर्स यूनियन (इंटक) के सदस्य थे।
आंकड़ों पर नजर डालें तो स्पष्ट रूप से सबसे अधिक सदस्यता परिवर्तन एसकेएमएस में दिखाई दे रहा है, जिससे यह माना जा रहा है कि सदस्यता सत्यापन प्रक्रिया का सबसे अधिक असर उसी यूनियन पर पड़ सकता है।
ज्ञात हो कि 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान बचेली में एसकेएमएस द्वारा हड़ताल का नोटिस देने के बाद, हड़ताल से पूर्व प्रबंधन को लिखित में हड़ताल से पीछे हटने का पत्र दिए जाने के बाद से ही एसकेएमएस और इंटक के बीच दूरी बढ़ गई थी। इसके बाद हाल ही में इंटक ने एनएमडीसी द्वारा 50 मिलियन टन लौह अयस्क के रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद वेज रिवीजन में हो रही देरी के विरोध में गांधीवादी तरीके से आंदोलन शुरू कर 50 मिलियन टन उत्पादन की उपलब्धि पर प्रबंधन द्वारा किए जाने वाले किसी भी प्रकार के जश्न के बहिष्कार की घोषणा कर माहौल को और गर्म कर दिया। श्रमिक वर्ग द्वारा इंटक के इस कदम को मिल रहे व्यापक समर्थन के बीच मुख्यालय प्रबंधन द्वारा 2 अप्रैल को हैदराबाद में बैठक बुलाए जाने की खबर के बाद श्रमिकों और यूनियनों के बीच हलचल तेज हो गई है।
ऑल इंडिया एनएमडीसी वर्कर्स फेडरेशन से सम्बद्ध दोनों यूनियनों के बीच चल रही खींचतान का फायदा नई बनी खदान मजदूर संघ (बीएमएस) उठाने की कोशिश में दिखाई दे रही है, जो धीरे-धीरे अपनी सदस्यता बढ़ाने में लगी है।
अब सदस्यता सत्यापन की प्रक्रिया के बाद स्थिति किस दिशा में जाएगी, इस पर कर्मचारियों, यूनियनों और प्रबंधन – सभी की नजर बनी हुई है।