मध्यप्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी अफसरों की संपत्ति पर चर्चा

करोड़ों की जमीन-जायदाद वाले आईएएस… पारदर्शिता के आंकड़े या नई बहस की शुरुआत? हाल ही में मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारियों की अचल संपत्ति के आंकड़े सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी। अब उसी कड़ी में पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के आईएएस अधिकारियों की संपत्ति के विवरण ने भी लोगों का ध्यान खींच लिया है।

आईपीएस अधिकारियों की संपत्ति चर्चा में रहने के बाद अब आईएएस अधिकारियों की घोषित प्रॉपर्टी भी सुर्खियों में है। सामने आए आंकड़ों के अनुसार राज्य के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक हैं। इनमें से कुछ के पास पैतृक जमीन-जायदाद है, जबकि कई अधिकारियों ने सेवा के दौरान निवेश के जरिए अपनी संपत्ति बढ़ाई है।

कहावत है —
ऊँचे दरख़्तों पर ही सबसे ज्यादा नजर जाती है।
प्रशासनिक व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली पदों पर बैठे अधिकारियों की संपत्ति भी इसलिए हमेशा चर्चा में रहती है।

सबसे संपन्न अफसरों में अमित कटारिया

छत्तीसगढ़ के सबसे संपन्न आईएएस अधिकारियों में गिने जाते हैं

अमित कटारिया

उनकी कुल घोषित संपत्ति लगभग 52 करोड़ रुपये बताई जाती है। हालांकि इसमें बड़ा हिस्सा पैतृक संपत्ति का है।

उनकी प्रमुख संपत्तियां हरियाणा के गुड़गांव में स्थित हैं —

  • लक्ष्मण विहार, गुड़गांव में 1 एकड़ जमीन – 4.5 करोड़
  • शीतला माता मंदिर के पास 2 एकड़ जमीन – 12 करोड़
  • शेरपुर, गुड़गांव में 1 एकड़ जमीन – 4.5 करोड़
  • शीतला माता मंदिर रोड पर 1.5 एकड़ जमीन – 7.5 करोड़
  • पुरानी दिल्ली रोड पर 1 एकड़ जमीन – 4.5 करोड़
  • संजय ग्राम में प्लॉट – 4 करोड़
  • गुड़गांव में फ्लैट – 8 करोड़
  • एमपीटी मॉल में शॉप – 3.5 करोड़
  • गुड़गांव में आवासीय मकान – 3.5 करोड़

इनमें से कई संपत्तियां भाइयों और बहनों के साथ संयुक्त रूप से दर्ज हैं।

कई राज्यों में फैली संपत्ति

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी

रेणु जी पिल्लई

की कुल घोषित संपत्ति 4 करोड़ 15 लाख रुपये है।

उनकी संपत्ति कई राज्यों में फैली हुई है —

  • भोपाल में कृषि भूमि – 50 लाख
  • रायपुर में कृषि भूमि – 50 लाख
  • आंध्रप्रदेश में आवासीय भूमि – 30 लाख
  • तेलंगाना में भूमि – 2 करोड़
  • नया रायपुर में घर – 85 लाख

मुख्यमंत्री सचिवालय के प्रमुख सचिव की संपत्ति

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव

सुबोध कुमार सिंह

की कुल संपत्ति 5 करोड़ 45 लाख रुपये बताई गई है।

उनकी संपत्ति उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में है —

  • रायपुर के धरमपुर में कृषि भूमि
  • बरेली में कृषि भूमि (पत्नी के नाम)
  • लखनऊ में मकान
  • रायपुर में रेसिडेंशियल प्लॉट
  • गोमती नगर, लखनऊ में प्लॉट
  • नया रायपुर में घर

अन्य करोड़पति आईएएस अधिकारी

पी दयानंद

कुल संपत्ति: 1.74 करोड़ रुपये

  • आरंग में भूमि
  • नया रायपुर में मकान
  • तेमारी गांव में भूमि (पत्नी के नाम)
  • सेरीखेड़ी में प्लॉट

रवि मित्तल

कुल संपत्ति: 3 करोड़ 2 लाख रुपये से अधिक

  • चंद्रपुर में पैतृक कृषि भूमि
  • नोएडा में दुकान
  • रायपुर में प्लॉट
  • अंबाला में जमीन (पत्नी के नाम)
  • मोहाली में भूमि

कलेक्टरों की संपत्ति भी चर्चा में

गौरव कुमार सिंह

इनकी पैतृक संपत्ति उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में है।
प्रॉपर्टी विवरण में कई हिस्सों में कृषि भूमि दर्ज है, हालांकि उनकी वर्तमान कीमत का उल्लेख नहीं किया गया है।

इसके अलावा रायपुर के सेरीखेड़ी में आवासीय भूमि भी दर्ज है।

संजय अग्रवाल

  • कचना, रायपुर में 3100 वर्गफुट के प्लॉट पर मकान – 1.30 करोड़
  • कचना, डुंडा और सेरीखेड़ी में कई प्लॉट
  • इन संपत्तियों से करीब 4.8 लाख रुपये सालाना आय

अजीत वसंत

  • नवा रायपुर में घर – 95 लाख
  • सेरीखेड़ी, रायपुर में प्लॉट – 30 लाख

कुलदीप शर्मा

  • मुरादाबाद और अलीगढ़ में कृषि भूमि
  • पलवल (हरियाणा) में जमीन
  • रायपुर के सेरीखेड़ी में आवासीय प्लॉट

गोपाल वर्मा

  • बलौदाबाजार में पैतृक मकान
  • रायपुर के नेवरा क्षेत्र में जमीन

क्यों सामने आते हैं ये आंकड़े?

दरअसल केंद्र सरकार ने भारत सरकार के निर्देश के अनुसार आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों के लिए हर साल अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य किया है। जनवरी महीने में अधिकारी अपनी अचल और चल संपत्ति की जानकारी देते हैं। इसी विवरण के आधार पर विभिन्न स्रोतों के माध्यम से ये आंकड़े सामने आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम पारदर्शिताऔर जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।

प्रशासनिक ताकत और संपत्ति की दिलचस्पी

आईएएस अधिकारी देश की सबसे प्रभावशाली प्रशासनिक सेवाओं में गिने जाते हैं। राज्य के विकास, नीतियों और प्रशासनिक फैसलों में उनकी बड़ी भूमिका होती है। ऐसे में जब उनकी घोषित संपत्ति सामने आती है तो आम लोगों की जिज्ञासा भी बढ़ जाती है।

एक मशहूर शेर यहां याद आता है –

ताज्जुब है कि ख़ामोशी भी चर्चा में बदल जाती है,
जब दौलत की कहानी सरकारी कागज़ों में नज़र आती है।

मध्यप्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ के आईएएस अधिकारियों की संपत्ति के आंकड़ों ने भी प्रशासनिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन संपत्तियों में पैतृक संपत्ति, वैध निवेश और पारिवारिक संपत्ति भी शामिल होती है, लेकिन इसके बावजूद इन आंकड़ों को लेकर लोगों की दिलचस्पी हमेशा बनी रहती है।

आखिरकार सवाल वही रहता है –
सरकारी सेवा की जिम्मेदारी जितनी बड़ी होती है, उतनी ही बड़ी उम्मीद पारदर्शिता की भी होती है।

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