प्रतापपुर: जनपद पंचायत प्रतापपुर की ग्राम पंचायत धुमाडांड में हो रहे तालाब गहरीकरण के कार्य को मनरेगा योजना का बताकर जेसीबी से कराए जाने की शिकायत निराधार साबित हुई है। इस संबंध में कार्यक्रम अधिकारी निर्मल सिंह श्याम ने एक बयान जारी कर बताया है कि कुछ दिनों पूर्व जनपद पंचायत कार्यालय प्रतापपुर को एक शिकायत प्राप्त हुई थी जिसमें बताया गया था कि ग्राम पंचायत धुमाडांड में पुरानी योजना मनरेगा के तहत दो लाख की लागत से तालाब गहरीकरण का कार्य कराया जा रहा है जिसे पंजीकृत मजदूरों से न कराकर जेसीबी मशीन से कराते हुए मजदूरों का रोजगार छीना जा रहा है। शिकायत मिलने पर मामले की जांच की गई तो पता चला कि उक्त कार्य मनरेगा योजना से नहीं बल्कि पंद्रहवें वित्त की राशि से कराया जा रहा है और शासन के नियमानुसार पंद्रहवें वित्त के कार्य में जेसीबी का उपयोग किया जा सकता है। जांच के दौरान सचिव, सरपंच, पंच व ग्रामीणों का एक हस्ताक्षर युक्त पंचनामा भी तैयार किया गया है जिसमें तालाब गहरीकरण के कार्य को पंद्रहवें वित्त मद से स्वीकृत होना बताया गया है। जांच में यह बात भी सामने आई है कि धुमाडांड में तालाब गहरीकरण के कार्य को पंद्रहवें वित्त मद के तहत तकनीकी स्वीकृति प्रदान कराने 23 फरवरी 2026 को पंचायत भवन में ग्राम सभा का आयोजन भी किया गया था। जिसमें उपस्थित ग्राम सभा के सदस्यों को बताया गया था कि पंचायत में मौजूद तालाब का गहरीकरण हो जाने से सिंचाई व पशुओं के लिए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। जिसके बाद सभी सदस्यों के अनुमोदन से तालाब गहरीकरण के कार्य को पंद्रहवें वित्त मद की राशि से कराए जाने हेतु प्रस्ताव भी पारित किया गया। कुल मिलाकर जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि तालाब गहरीकरण का कार्य पंद्रहवें वित्त की राशि से हो रहा है इसका मनरेगा योजना से कोई लेना-देना नहीं है।
एक्सीवेटर से तालाब गहरीकरण का शिकायत निराधार

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Mar