नई दिल्ली। भारत के लगभग हर राज्य से इन दिनों एक जैसी तस्वीरें सामने आ रही हैं—गैस एजेंसियों के बाहर रात 3 बजे से लगी लंबी कतारें, खाली सिलेंडर और लोगों का बढ़ता गुस्सा। दिल्ली से लेकर मुंबई और यूपी से लेकर राजस्थान तक, देश में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत ने ‘पैनिक बटन’ दबा दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि अब लोग सिलेंडर के भरोसे रहने के बजाय इंडक्शन कुकटॉप की ओर भाग रहे हैं, जिससे इनकी बिक्री में 500 प्रतिशत तक का उछाल देखा जा रहा है।
हर तरफ त्राहि-त्राहि: शादियों का सीजन और सूखी रसोई
देश के कई हिस्सों में बुकिंग के 10-10 दिन बाद भी डिलीवरी नहीं हो पा रही है। लखनऊ, नागपुर और जबलपुर जैसे शहरों में होटलों ने गैस की कमी के कारण लकड़ी के चूल्कों पर खाना बनाना शुरू कर दिया है। यूपी के सिद्धार्थनगर में तो पुलिस सुरक्षा के बीच सिलेंडर बांटे जा रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन तक में नोटिस लग गया है कि गैस की कमी के कारण मुख्य भोजन (Main Course) नहीं मिल पाएगा।
सरकार एक्शन मोड में: लागू हुआ ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट’
संकट गहराता देख केंद्र सरकार ने देशभर में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू कर दिया है। जमाखोरी रोकने के लिए अब बुकिंग नियमों में कड़े बदलाव किए गए हैं:
नया नियम: अब एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद अगले सिलेंडर की बुकिंग 25 दिन बाद ही हो सकेगी।
सख्त वेरिफिकेशन: बिना OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के डिलीवरी एजेंट सिलेंडर नहीं दे पाएगा।
प्राथमिकता तय: सरकार ने 3 सदस्यीय कमेटी बनाई है जो यह तय करेगी कि गैस की सप्लाई पहले कहां जरूरी है।
क्यों पैदा हुआ यह संकट?
भारत अपनी जरूरत का 66% LPG सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देशों से आयात करता है। वर्तमान में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते में आ रही बाधाओं ने सप्लाई चेन को तोड़ दिया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है, और आयात का 90% हिस्सा इसी संवेदनशील समुद्री रास्ते से आता है।
विकल्प की तलाश में संस्थान
रेलवे (IRCTC) ने भी अपने केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि वे खाने के लिए माइक्रोवेव और इंडक्शन का इस्तेमाल बढ़ाएं और ‘रेडी टू ईट’ फूड का स्टॉक रखें। प्रधानमंत्री मोदी ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी है और स्पष्ट किया है कि सरकार हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर दिखना स्वाभाविक है।