जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में लाल आतंक के खिलाफ चलाए जा रहे ‘पूना नारकोम’ (नई सुबह) अभियान को आज एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता मिली है। बस्तर के शौर्य भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKZC) के 108 सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस अधिकारियों और सामाजिक प्रतिनिधियों के सामने अपने हथियार डाल दिए। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर सामूहिक रूप से 3 करोड़ 95 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
बस्तर पुलिस और प्रशासन के लिए यह दिन मील का पत्थर साबित हो रहा है, क्योंकि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में इनामी नक्सलियों का मुख्यधारा में लौटना माओवादी संगठन की कमर टूटने जैसा है। आत्मसमर्पण करने वाले इन सदस्यों में संगठन के कई बड़े चेहरे शामिल हैं, जिनमें 6 डिवीजन कमेटी मेंबर, 3 कंपनी पार्टी कमेटी मेंबर, 18 पीपीसीएम रैंक और 23 एरिया कमेटी रैंक के हार्डकोर नक्सली हैं। ये सभी मुख्य रूप से बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर, कांकेर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों के घने जंगलों में सक्रिय थे।
1300 नक्सली लौटे मुख्यधारा में बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने इस मौके पर बताया कि पिछले 6 महीनों के भीतर बस्तर संभाग में लगभग 1300 माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने अन्य सक्रिय नक्सलियों से भी अपील की है कि वे सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और समाज के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद आत्मसमर्पण के साथ ही पुलिस ने नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान अब तक की सबसे बड़ी ‘डंपिंग’ (बरामद हथियारों) का भी प्रदर्शन किया। बीते कुछ दिनों में सुरक्षाबलों ने सर्चिंग के दौरान रिकॉर्ड तोड़ मात्रा में विस्फोटक, अत्याधुनिक हथियार और रसद सामग्री बरामद की है, जो नक्सलियों के घटते प्रभाव का सीधा संकेत है। शासन की ओर से आत्मसमर्पित नक्सलियों को तात्कालिक सहायता राशि प्रदान की गई है और उनके बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा व रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का वादा किया गया है।