रायपुर। छत्तीसगढ़ की विभिन्न केंद्रीय और जिला जेलों में जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच कुल 66 बंदियों की मौत का मामला विधानसभा में गूंजा। प्रश्नकाल के दौरान उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इन 66 मामलों में से 18 प्रकरणों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो चुकी है, जबकि शेष 48 मामलों में जांच जारी है।
सदन में इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरते हुए एक आदिवासी नेता की मौत को हत्या करार दिया और पूरे मामले की जांच विधानसभा की समिति से कराने की मांग की। विपक्ष ने जेलों में बंदियों की सुरक्षा और उपचार को लेकर गंभीर सवाल उठाए और सदन में नारेबाजी करते हुए वॉकआउट कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कवर्धा जेल के पंकज साहू और कांकेर जेल के जीवन ठाकुर के मामलों का उल्लेख करते हुए मृतकों की सूची और जेलवार विवरण न मिलने पर आपत्ति जताई।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि पंकज साहू की मृत्यु निर्धारित अवधि से पहले की होने के कारण इस सूची में शामिल नहीं है। वहीं जीवन ठाकुर के मामले में उन्होंने बताया कि उन पर फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के आरोप थे और उन्हें न्यायालय की अनुमति के बाद ही उपचार के लिए रायपुर लाया गया था। गृहमंत्री ने कहा कि जेल अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार वे उपचार में सहयोग नहीं कर रहे थे और उनकी मजिस्ट्रेट जांच पहले से चल रही है, इसलिए किसी अन्य जांच की आवश्यकता नहीं है।
चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने राज्य में अपराधों में 35 प्रतिशत वृद्धि होने का दावा किया, जिसे गृहमंत्री ने खारिज करते हुए कहा कि भाजपा शासनकाल में अपराधों में कमी आई है। इस दौरान ड्रग रैकेट से जुड़ी नव्या मलिक के नाम को लेकर भी सवाल पूछे गए, जिस पर गृहमंत्री ने अलग से जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही।