सरायपाली क्षेत्र में मनमानी तरीके से खुले में गिट्टी, बजरी , रेत , फ्लाईऐश व भूसा का किया जा रहा परिवहन पर कार्रवाई शून्य

◾एनजीटी नियमों की उड़ रही धज्जियां, स्थानीय प्रशासन, परिवहन विभाग व पुलिस टीम भी मूकदर्शक बनी◾दिलीप गुप्ता सरायपाली:- सरायपाली नगर के अंदर नगर के चारों तरफ से ट्रकों , डंफरो व ट्रैक्टरों में खुले आम गिट्टी , बालू , भूसा , बजरी व डस्ट भरकर परिवहन किया जा रहा है । नियमतः एनजीटी नियमों के अनुसार इन वाहन चालकों को तालपत्री ढांक कर परिवहन किया जाना चाहिए किन्तु ऐसा हो नहीं रहा है ।

अधिकांश लोकल चलने वाली किसी भी गाड़ियों में तालपत्री ढांक के परिवहन नहीं किया जा रहा है । नगर के अंदर व बाहर खुले में परिवहन किए जाने से वाहनों में रखे इन सामानों के कणों से पीछे आ रहे राहगीरों व नगरवासियों के आंखों व मुंह में यह कण घुसने से आंखों व शरीर को नुकसान पहुंच रहा है । इस तह की अनेकों वा हने प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरती है पर स्थानीय प्रशासन , पुलिस व परिवहन विभाग द्वारा इसे कभी भी गंभीरता से नहीं लिए जाने के कारण नियमों की धज्जियां उड़ाते गाड़ियां चलाई जा रही है । इन वाहनों में खुले में बगैर तलपत्री के परिवहन किए जाना कानूनी अपराध है व इस पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है

किंतु कार्यवाही के अभाव में इस पर कोई रोक नहीं है व बेधड़क अनेक वाहने लगातार चल रही है । मुख्य मार्ग पर रोजाना खुले में गिट्टी, बजरी जैसे खनिज मटेरियल का परिवहन किया जा रहा है। इन वाहनों पर न पुलिस , परिवहन विभाग और न ही खनिज अमला के द्वारा कोई जांच की जा रही है और न ही इस पर कोई रोक लगाई जा रही है। ऐसे में भारी वाहनों पर मनमानी ढंग से खनिज मटेरियल की सप्लाई बदस्तूर जारी है।इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार शिवा ट्रांसपोर्ट की अनेक 18 चक्का वाहनों में सरसीवां तरफ से आकर विशाखापत्तनम जाने की जानकारी दी गई है । इस ट्रांसपोर्ट की अनेक गाड़ियां सरसीवां से सरायपाली मार्ग होते हुवे अन्य राज्यों में जा रही है ।

भारी वाहनों के लगातार चलने से यह मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है । 50 – 50 टनो की गाड़ियों के लगातार आवागमन से सड़कों की हालत भी बहुत खराब हो चुकी है । 40 किलोमीटर की दूरी जहां पहले 1घंटे का समय लगता था अब 2 घंटे में भी नहीं पहुंचा जा सकता है । ऊपर से ट्रकों व सड़कों से उसने वाली धूल से सभी परेशान हैं ।इसी तरह सरायपाली क्षेत्र के आसपास अनेक कर्सर मशीन स्थापित है जहां से सैकड़ों वाहनों में गिट्टी , बजरी , डस्ट व फ्लाईऐश लोड होकर आपूर्ति की जा रही है । यहां पर एनजीटी के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। एनजीटी के नियमों का पालन कराने कोई नहीं है। ऐसे में भारी वाहनों पर बगैर तलपत्रीयों और ओवरलोड गिट्टी, बजरी का परिवहन किया जा रहा है। बिना ढंके मटेरियल की सप्लाई करने से राहगीरों व वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। वहीं सारंगढ़ व आसपास क्षेत्र के क्रशर मालिकों के द्वारा डोलोमाइट मटेरियल में चूना पत्थर के गिट्टी व बजरी का मिलावट कर ऊंचे दामों में बिक्री किया जा रहा है। इसके बाद भी खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारीयों द्वारा संज्ञान में नहीं लिया जा रहा है और न ही कोई कार्रवाई की जा रही है । बताते हैं कि इन वाहन चालकों द्वारा विभिन्न विभागो के अधिकारियों को मंथली वसूली कर इन वाहनों को खुले में परिचालन करने छूट दे दी गई है। पुलिस की टीम कभी कभी चेकिंग पाइंट लगाकर छोटे व चार पहिए वाहनों की जांच करती हैं लेकिन बड़े ट्रकों व डंफरो की जांच नहीं की जाती न ही कोई कार्यवाही करने की कोई सूचना है । इसी तरह बैतारी स्थित आइल मिल से निकलने वाले डस्ट ट्रैक्टरों व अन्य वाहनों से ले जाने हेतु रखा गया है । इन वाहनों द्वारा ओव्हर लोड तो भरा ही जाता है पर किसी भी वाहन को तालपत्री से ढांका नहीं जाता जिससे यह खुले में उड़ता भी है व सड़कों में भी गिरता है । इन वाहनों के पीछे चल रहे राहगीरों के आंखों में डस्ट घुसने की आम शिकायतें आ रही हैं ।नगर व नगर के आसपास काफी संख्याओं में भवन व अन्य निर्माण कार्य चल रहे हैं सड़कों का भी काम हो रहा है । इन्हें निर्माण सामग्री इन्हीं खुले वाहनों से किया जा रहा है । सैकड़ों की संख्याओं में निर्माण सामग्री लेकर जा रहे किसी भी वाहनों में तालपत्रीयों से बगैर ढांके ही परिवहन किया जा रहा है । ◾एनजीटी नियम क्या कहता है ◾ट्रक/डंपर में गिट्टी, बालू, मिट्टी, भूसा, बजरी आदि को खुले में (बिना ढके) ले जाना पर्यावरण नियमों का उल्लंघन माना जाता है। इसके खिलाफ National Green Tribunal (NGT) और अन्य कानूनों में स्पष्ट प्रावधान हैं।🔹 लागू नियम और प्रावधानAir (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981खुले में सामग्री ले जाने से धूल (Air Pollution) फैलती है, जो इस कानून के तहत अपराध है।Motor Vehicles Act, 1988वाहन में ओवरलोडिंग या असुरक्षित तरीके से माल ले जाना (बिना ढके) नियमों के खिलाफ है।ट्रांसपोर्ट विभाग चालान/जुर्माना कर सकता है।Central Pollution Control Board Guidelines (CPCB) द्वारा स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि ढीली सामग्री (Loose Material) को तिरपाल (Tarpaulin) से ढकना अनिवार्य है।राज्य स्तर के नियम (जैसे छत्तीसगढ़ में):खनिज परिवहन नियम और जिला प्रशासन/पुलिस द्वारा विशेष आदेश लागू रहते है ।NGT ने कई मामलों में कहा है कि:खुले ट्रकों से सामग्री ले जाना धूल प्रदूषण का बड़ा स्रोत हैयह जन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैऐसे मामलों में “Polluter Pays Principle” लागू होता है (जो प्रदूषण करेगा, वही भुगतान करेगा) । ऐसे वाहनों पर जुर्माना (Environmental Compensation)प्रति वाहन हजारों से लाखों तक जुर्माना लगाया जा सकता है तथा बार बार उल्लंघन किए जाने पर वाहनो की जब्ती / सीज किए जाने का प्रावधान है ।

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