कोरिया 24 फरवरी 2026/ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वंचित वर्ग के हितग्राहियों के पक्के मकान का सपना पूरा करने वाली आवास योजना से लाभार्थियों के जीवन में बदलाव का क्रम निरंतर जारी है। ऐसे गरीब ग्रामीण जिन्हे पक्के मकान बनाने का सामर्थ्य नहीं था वह भी योजना से लाभ लेकर अब सम्मानपूर्वक जीवन जीने लगे हैं। ऐसी ही एक कहानी है कोरिया जिले के ग्राम पंचायत उमझर निवासी अर्जुन की, जिन्होने किसान मजदूर के तौर पर अपने कठिन जीवन में कभी नहीं सोचा था कि वह कभी पक्के मकान में रह पाएंगे लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनका जीवन बदल दिया है।
पूर्व की स्थिति
जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर की ग्राम पंचायत उमझर निवासी श्री अर्जुन पिता सुखदेव का जीवन कभी कठिन परिस्थितियों से घिरा हुआ था। एक साधारण किसान मजदूर के रूप में उनकी रोज़ की कमाई ही परिवार के भरण-पोषण का आधार थी। सीमित आय और बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच उनका जीवन संघर्षों से भरा था। उनका कच्चा मकान समय के साथ जर्जर हो चुका था। बरसात के मौसम में दीवारों से पानी रिसता, छत टपकती और हर पल घर गिरने का डर बना रहता। हर वर्ष मरम्मत पर खर्च होने वाली राशि उनकी छोटी-सी बचत को समाप्त कर देती थी। ऐसे में भविष्य के सपने अधूरे ही रह जाते थे।

प्रधानमंत्री आवास से बदली परिस्थिति
हितग्राही अर्जुन के जीवन में को गत वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से एक बेहद सकारात्मक परिवर्तन आया। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत उन्हें पक्का मकान बनाने के लिए एक लाख बीस हजार रुपये की सहायता राशि तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में प्राप्त हुई। इसमें अपनी कमाई के कुछ पैसे लगाकर इस परिवार ने अपने वर्षों के सपने को साकार कर एक पक्का आवास बना लिया। मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने निर्धारित समय में अपने नए घर का निर्माण पूर्ण किया। मजबूत दीवारें, सुरक्षित छत और व्यवस्थित कमरों वाला यह घर अब उनके आत्मविश्वास का आधार बन चुका है। अब उनकी हर रात सुकून से कट रही है। इसके साथ ही उन्हे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत 90 दिवस की मजदूरी और स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय निर्माण हो जाने से उनके जीवन में सुरक्षा, स्वच्छता और सम्मान तीनों सुनिश्चित किए।
नई उम्मीद, नया आत्मविश्वास
आज अर्जुन और उनका परिवार सुरक्षित पक्के घर में सुकून की जिंदगी जी रहा है। बारिश अब भय का कारण नहीं रही। उनके चेहरे पर संतोष और आत्मविश्वास की मुस्कान साफ झलकती है। वे कहते हैं कि यह सहायता उनके लिए जीवन बदलने वाला अवसर साबित हुई। अब वे अपने गांव के अन्य पात्र परिवारों को भी जल्द आवास निर्माण हेतु जागरूक कर रहे हैं, ताकि हर जरूरतमंद को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिल सके।