रमेश गुप्ता भिलाई/नई दिल्ली — समाज में जागरूकता फैलाने और संवेदनशील मुद्दों को सामने लाने में पत्रकारों की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में दो दिवसीय “मीडिया मंथन” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें महिला मुद्दों पर जिम्मेदार और जेंडर-संवेदनशील रिपोर्टिंग पर विशेष चर्चा हुई।

राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा आयोजित इस नेशनल जर्नलिस्ट मीट में देशभर से 74 पत्रकारों ने भाग लिया। इसमें छत्तीसगढ़ से पांच महिला पत्रकारों ने प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। भिलाई से कोमल धनेसर, भावना पांडेय, संगीता मिश्रा, श्वेता शर्मा और सुप्रिया पांडेय इस सम्मेलन में शामिल हुईं।कार्यक्रम में देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रिंट और डिजिटल मीडिया के पत्रकार, संपादक, कानूनी विशेषज्ञ और मीडिया पेशेवर मौजूद रहे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य मीडिया को महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अधिक जिम्मेदार, नैतिक और संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए सशक्त बनाना था।कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने किया।

इस अवसर पर सदस्य सचिव सुदीप जैन और अतिरिक्त सचिव बी. राधिका चक्रवर्ती भी उपस्थित रहे।अपने संबोधन में अध्यक्ष ने कहा कि मीडिया समाज की सोच को दिशा देने में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए पत्रकारों को संवेदनशील विषयों पर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जेंडर-सेंसिटिव रिपोर्टिंग का अर्थ महिलाओं की आवाज को सम्मान देना है, न कि उसे सनसनीखेज बनाना।उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कार्यशाला के बाद पत्रकार अपनी लेखनी और आवाज के माध्यम से न केवल महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे, बल्कि पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।यह सम्मेलन पत्रकारों के लिए सीखने और विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ, जहां महिलाओं से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग में आने वाली चुनौतियों, जिम्मेदारियों और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।