नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को सदन को संबोधित करते हुए केंद्र की मोदी सरकार और अमेरिका के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते पर तीखे प्रहार किए। राहुल गांधी ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने अमेरिकी दबाव में आकर यह ट्रेड डील की है। उन्होंने आगाह किया कि भविष्य में अमेरिका फिर से टैरिफ बढ़ा सकता है और उसकी मुख्य नजर भारत के डेटा पर है।
राहुल गांधी ने इकोनॉमिक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान विश्व एक बड़े जियोपॉलिटिकल टकराव और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। यूक्रेन, गाजा और मिडिल ईस्ट के हालातों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में एनर्जी और फाइनेंशियल हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है और अमेरिकी डॉलर के दबदबे को चुनौती दी जा रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने भारतीय डेटा को 21वीं सदी की सबसे कीमती संपत्ति बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी सुपरपावर की स्थिति और डॉलर को बचाने के लिए भारतीय डेटा का एक्सेस चाहता है। राहुल ने सरकार पर आरोप लगाया कि इस समझौते के जरिए भारत ने अपने डिजिटल ट्रेड रूल्स पर कंट्रोल छोड़ दिया है और डेटा लोकलाइजेशन की जरूरत को खत्म कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि बड़ी टेक कंपनियों को 20 साल का टैक्स हॉलिडे क्यों दिया गया और सोर्स कोड डिस्क्लोज करने की शर्त क्यों हटाई गई।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के रिश्तों पर तंज कसते हुए राहुल ने कहा कि यदि इंडिया गठबंधन सत्ता में होता, तो वह बराबरी के स्तर पर बात करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम किसी के नौकर नहीं हैं। ट्रंप के साथ बातचीत में भारत का पक्ष रखते हुए हम यह साफ करते कि हमारी एनर्जी सिक्योरिटी और किसानों के हित सर्वोपरि हैं। कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि भारत की तुलना पाकिस्तान के साथ नहीं की जानी चाहिए और विदेशी नेतृत्व के साथ संबंधों में देश के स्वाभिमान का ध्यान रखा जाना चाहिए।