रायपुर। छत्तीसगढ़ में डीएड और डीएलएड के हजारों प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद अब तक सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति नहीं मिल पाई है। इससे नाराज़ अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से नया रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक सरकार उन्हें नियुक्ति नहीं देगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
धरने पर बैठे अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्होंने परीक्षा उत्तीर्ण की, सभी पात्रताएं पूरी कीं और अंततः सुप्रीम कोर्ट से उनके पक्ष में निर्णय भी आया, इसके बावजूद राज्य सरकार आदेश को लागू करने में गंभीरता नहीं दिखा रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मामला केवल रोजगार का नहीं, बल्कि न्याय के सम्मान का है।
इस आंदोलन को अब युवा कांग्रेस का खुला समर्थन मिल गया है। इसी कड़ी में युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बुधवार को रायपुर जिलाधीश को ज्ञापन सौंपकर डीएड–डीएलएड अभ्यर्थियों की शीघ्र नियुक्ति की मांग की।
इस मौके पर युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा ने कहा कि ये युवा कोई अवैध मांग नहीं कर रहे हैं। “इन्होंने परीक्षा दी, पास हुए और सुप्रीम कोर्ट का आदेश इनके पक्ष में है। इसके बावजूद सरकार नियुक्ति नहीं दे रही है, जो सरकार की नीति और नीयत दोनों पर सवाल खड़े करता है। अभ्यर्थी कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन सरकार पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है,”।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में डीएड, डीएलएड और बीएड अभ्यर्थियों का विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। पहले राज्य सरकार द्वारा बीएड अभ्यर्थियों को सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति दी गई थी। इसके बाद डीएड–डीएलएड अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां से आदेश दिया गया कि प्राथमिक सहायक शिक्षक पदों पर डीएड–डीएलएड अभ्यर्थियों को नियुक्त किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने बीएड अभ्यर्थियों को सहायक शिक्षक पदों से हटाया, जिससे बीएड अभ्यर्थी भी आंदोलन पर उतर आए। उनके दबाव को देखते हुए सरकार ने बीएड अभ्यर्थियों के समायोजन का निर्णय तो ले लिया, लेकिन डीएड–डीएलएड अभ्यर्थियों को आज तक नियुक्ति नहीं दी गई।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का भी पालन नहीं हो रहा, तो डीएड–डीएलएड अभ्यर्थियों को न्याय कब मिलेगा? लगातार जारी भूख हड़ताल से अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।