छत्तीसगढ़ की जेलों में शुरू होगी वीडियो कॉलिंग सुविधा: बंदियों के पुनर्वास के लिए जेल विभाग और बीएसएनएल के बीच हुआ एमओयू

रायपुर: छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद कैदियों के मानवीय अधिकारों और उनके सामाजिक पुनर्वास को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। जेल मुख्यालय ने भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत प्रदेश की सभी 33 जेलों में वीडियो और ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। इस सुविधा के माध्यम से बंदी अपने परिजनों और अधिवक्ताओं से तकनीक के जरिए आसानी से संपर्क कर सकेंगे।

उप मुख्यमंत्री और जेल मंत्री विजय शर्मा के निर्देशों पर शुरू की जा रही इस पहल का मुख्य उद्देश्य बंदियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। अक्सर देखा गया है कि परिजनों से लंबे समय तक दूरी के कारण कैदियों में तनाव और अवसाद की स्थिति पैदा होती है। यह नई व्यवस्था न केवल उनके मानसिक संतुलन को बनाए रखने में सहायक होगी, बल्कि उनके व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाकर समाज में उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को भी सुदृढ़ करेगी।

एमओयू के प्रावधानों के अनुसार, बीएसएनएल द्वारा सभी जरूरी मशीनें, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर मुफ्त में उपलब्ध कराए जाएंगे। वर्तमान में राज्य की 17 जेलों में केवल ऑडियो कॉलिंग की सुविधा है, लेकिन अब पहली बार वीडियो कॉलिंग का विकल्प भी दिया जा रहा है। ऑडियो कॉल के लिए प्रति मिनट एक रुपया और वीडियो कॉल के लिए पांच रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। प्रत्येक बंदी को सप्ताह में एक बार पांच मिनट के लिए इस सुविधा का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा।

योजना के पहले चरण में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर जैसी केंद्रीय जेलों के साथ-साथ जशपुर, रायगढ़ और दंतेवाड़ा जैसी जिला जेलों में वीडियो और ऑडियो दोनों सिस्टम लगाए जाएंगे। अन्य जिला जेलों और उप जेलों में फिलहाल ऑडियो कॉलिंग सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। इस व्यवस्था से कैदियों के परिजनों को जेल तक आने-जाने में होने वाले समय और खर्च की बचत होगी। जेल विभाग को विश्वास है कि यह प्रणाली सुधारात्मक प्रशासन में पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगी।

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