जनकपुर में नहर लाइनिंग और वाटर कोर्स लाइनिंग कार्य में भारी अनियमितता
भानुप्रतापपुर। जल संसाधन विभाग का नया करनामा सामने आया है। जहाँ विकासखण्ड के एक जलाशय में मनरेगा के तहत हो रहे नहर लाइनिंग कार्य व पुलिया निर्माण कार्य के लिए जेसीबी और डोजर का प्रयोग किया गया। ग्रामीण जब लम्बित भुगतान के लिए एसडीएम कार्यालय पहुंचे तब इस मामले का खुलासा हुआ। मामला प्रकाश में आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और मजदूरों तथा वाहन मालिको को नगद भुगतान का आश्वासन दिया गया है। इस पूरे मामले में विभाग के बड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह है, क्योंकि जहाँ मजदूरों से काम कराया जाना था वहाँ मशीनों का प्रयोग कर शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई दूसरी और मजदूरों के हक पर भी डाका डाला गया। इसमें शामिल इंजीनियर व एसडीओ पर विभाग द्वारा अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई उल्टे उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है। मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों को भी निरस्त कर दिया गया है, उसके बावजूद विभाग द्वारा यह कार्य कराया जा रहा था जिसकी उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए व दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए।

ज्ञात हो कि जल संसाधन विभाग द्वारा ग्राम पंचायत परवी के आश्रित ग्राम जनकपुर में मनरेगा के तहत तालाब के माइनर में नहर लाइनिंग कार्य एवं वाटर कोर्स लाइनिंग कार्य 6 महीने पूर्व मशीनों से कराया गया था। 1 महीने में यह काम बंद भी हो गया। मजदूरों ने राशि की मांग की तो कुछ राशि का भुगतान ऑनलाइन कर दिया गया तथा शेष राशि भुगतान शीघ्र करने की बात विभाग के अधिकारी ने कही। महीनों बाद जब भुगतान नहीं हुआ और विभाग के अधिकारी पल्ला झाड़ने लगे तब मजदूरों ने एसडीएम कार्यालय और जल संसाधन विभाग के एसडीओ को ज्ञापन सौप कर शीघ्र भुगतान की मांग करी। इस आवेदन में स्पष्ट लिखा है कि 34 हज़ार 452 रुपये मजदूरी भुगतान शेष है, 12000 रुपये ट्रेक्टर मुरुम का शेष है, डोजर से काड़ा नाली मेड़ हटाया एवं मिट्टी डाला गया कुल 15.45 घंटा काम हुआ, जेसीबी से पुलिया खुदाई एवं कैनाल में मुरूम डाला गया जिसमे कुल 18.27 घंटा काम हुआ है। इसके अलावा रेत डालने वालों का 45000 बक़ाया है, पानी ढुलाने के काम में लगा ट्रैक्टर जिसका 18000 बकाया है, कई व्यापारियों का भी सामग्री का लाखों रुपये भुगतान लंबित है।

भुगतान लम्बित होने से मजदूर और वाहन मालिक परेशान
घोठा निवासी शिवलाल कोमरा, टिकेश्वर कावड़े, राम प्रसाद कावड़े, फगनूराम उइका ने बताया कि विभाग के एसडीओ के कहने पर हमारे द्वारा 70 ट्रिप रेत निर्माण स्थल पर डाला गया जिसमे 25 हज़ार नगद दिया गया व शेष राशि के लिए साहब के द्वारा घुमाया जा रहा है। ना तो वे फ़ोन उठाते ना ही कार्यालय में मिलते। इसी तरह ग्रामीण पुरुषोत्तम, नमेंद्र, अनिल, सावंत, जागेश्वर, नारायण, माखन, सुखेन्द्र, संतोष, तामेश्वरी, ममता, सावित्री, बिमला, अनिता, नरसो, कुमारी, साधना और सुरेंद्र ने संयुक्त रूप से जब भी अपनी मजदूरी भुगतान की फरियाद लेकर कार्यालय पहुँचते तो साहब मुख्यालय से नदारद रहते। इनकी मजदूरी का 34 हजार 452 रुपये लंबित है। डोजर मालिक का 6000 और जेसीबी मालिक का लगभग 20000 रुपये बकाया है। इसके अलावा कई व्यापारियों का भी सामग्री का लाखों का भुगतान बकाया है।
कार्य की गुणवत्ता पर भी उठ रहे सवाल
एक और अधिकारी मुख्यालय से गायब रहते है ना तो फील्ड में निरीक्षण पर जाते है ना ही कार्यालय के अन्य कार्य समय पर हो रहे है। इन्ही के चलते विभागीय निर्माण कार्यों की गुणवत्ता ताक पर है। जनकपुर के तालाब में नहर लाइनिंग कार्य और वाटर कोर्स लाइनिंग कार्य भी विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। निर्माण के लिए घटिया स्तर रेत और निन्म क्वालिटी की सीमेंट का प्रयोग किया गया है। निर्माण के दौरान पानी की क्यूरिंग भी नहीं की जा रही है। नहर में जहाँ वाटर कोर्स लाइनिंग किया जा रहा है उस नहर में पानी ही नहीं आ रहा है। इससे किसानो को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। यह कार्य केवल जल संसाधन विभाग के अधिकारी अपनी जेबें भरने के लिए करवा रहे है।

मजदूरों के जगह मशीनों का प्रयोग नियम के विपरीत
जल संसाधन विभाग के द्वारा शासन के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। मनरेगा के तहत ग्रामीण मजदूरों को 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है। लेकिन मजदूरों को रोजगार देने के बजाय मशीनों का प्रयोग कर विभाग द्वारा खुल कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जो काम सप्ताह में होना है वह मशीनों के द्वारा 18-20 घंटों में पूरा किया जा रहा है। मजदूरों के नाम फर्जी मास्ट्रोल बनाकर और व्यापारियों से साँठ गाँठ कर सामग्री के बिलों में हेर फेर कर लाखो का मुनाफा विभाग के अधिकारी अपनी जेबों में डाल रहे है। इधर जिन मजदूरों ने कार्य किया है उनका भुगतान अब तक नहीं किया गया जिससे उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।