वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब एक अत्यंत निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। व्हाइट हाउस से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के सबसे महत्वपूर्ण परमाणु संसाधन, यानी लगभग 453.5 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) पर कब्जा करने के लिए एक बड़े सैन्य ऑपरेशन पर विचार कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि इस मिशन को हरी झंडी मिलती है, तो अमेरिकी सैनिकों को लंबे समय तक ईरान की धरती पर मौजूद रहना पड़ सकता है, जो इस युद्ध में भारी तेजी का संकेत होगा।
ट्रंप का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर पाए। हालांकि, इस ऑपरेशन में शामिल होने वाले अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन के भीतर गहरी चिंताएं भी बनी हुई हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कूटनीतिक रास्ते को भी खुला रखा है और अपने सलाहकारों से कहा है कि वे ईरान पर दबाव डालें कि वह एक समझौते के तहत यह सामग्री सौंप दे। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान को अमेरिका की शर्तें माननी होंगी, अन्यथा उसे अस्तित्व के संकट का सामना करना पड़ सकता है।
बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण होगा यह मिशन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के सुरक्षित ठिकानों से यूरेनियम निकालना हाल के वर्षों का सबसे कठिन सैन्य अभियान हो सकता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अनुसार, यह भंडार इस्फहान की भूमिगत सुरंगों और नतान्ज के प्लांट में केंद्रित हो सकता है। इस ऑपरेशन के लिए अमेरिकी सैनिकों को ईरानी वायु रक्षा प्रणाली, ड्रोन और मिसाइलों के खतरों के बीच दुश्मन के इलाके में उतरना होगा। माना जा रहा है कि यूरेनियम 40 से 50 विशेष सिलेंडरों में रखा है, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए भारी साजो-सामान और विशेष वाहनों की आवश्यकता होगी। यूएस सेंट्रल कमांड के पूर्व अधिकारियों का कहना है कि जमीनी हालात के आधार पर इस मिशन में कई दिन या एक सप्ताह से भी अधिक समय लग सकता है।
भीषण युद्ध की आशंका और सैन्य तैयारियां जानकारों ने चेतावनी दी है कि यूरेनियम पर कब्जे के प्रयास से क्षेत्र में एक लंबी और खूनी जंग छिड़ सकती है। ईरान इस सामग्री को अपने अस्तित्व से जोड़कर देखता है, इसलिए वह जवाबी कार्रवाई में पूरी ताकत झोंक सकता है। इस बीच, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) अपनी युद्धक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 10,000 अतिरिक्त सैनिकों को भेजने पर विचार कर रहा है। इसमें मरीन की रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के पैराट्रूपर्स को भी अलर्ट पर रखा गया है।
कूटनीति का विकल्प अब भी मौजूद सैन्य विकल्पों के साथ-साथ वॉशिंगटन अब भी बातचीत के जरिए समाधान निकालने को प्राथमिकता दे रहा है। अमेरिका के पास पहले भी कजाकिस्तान और जॉर्जिया जैसे देशों से संवर्धित यूरेनियम हटाने का सफल अनुभव रहा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने संकेत दिया है कि यदि ईरान स्वेच्छा से अपनी परमाणु क्षमताओं को छोड़ने का फैसला करता है, तो जोखिम भरे सैन्य अभियान की जरूरत खत्म हो जाएगी। फिलहाल अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रंप के हाथों में है, जबकि सैन्य योजनाकार हर स्थिति के लिए रणनीतियां तैयार करने में जुटे हैं।