नई दिल्ली। पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा ‘Four Stars of Destiny: An Autobiography’ इन दिनों भारतीय राजनीति के केंद्र में है। संसद के बजट सत्र के दूसरे दिन, 2 फरवरी 2026 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस किताब के अंशों का हवाला देते हुए सरकार को घेरा, जिसके बाद सदन में भारी शोर-शराबा हुआ।
किताब के वो 2 बड़े खुलासे, जिन पर मचा है बवाल जनरल नरवणे की यह 448 पन्नों की किताब उनके 40 साल के सैन्य करियर पर आधारित है। इसमें मुख्य रूप से दो मुद्दों ने विवाद खड़ा कर दिया है:
लद्दाख में चीन के साथ तनाव (2020): किताब के अनुसार, 31 अगस्त 2020 की रात को रेचिन ला पास पर चीनी टैंक भारतीय पोस्ट के बेहद करीब (कुछ सौ मीटर दूर) आ गए थे। नरवणे ने लिखा कि जब उन्होंने आलाकमान से आदेश मांगा, तो उन्हें कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिला और पूरी जिम्मेदारी (हॉट पोटैटो) उन्हीं पर छोड़ दी गई। राहुल गांधी ने इसी हिस्से को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठाए।
अग्निपथ योजना पर सेना की राय: किताब में दावा किया गया है कि अग्निपथ योजना सेना के लिए एक ‘झटके’ की तरह थी। नरवणे ने लिखा कि सेना का मूल प्रस्ताव अलग था, लेकिन जो फाइनल स्कीम आई, उससे सेना हैरान थी। उन्होंने शुरुआती 20,000 रुपये की सैलरी को भी ‘अस्वीकार्य’ बताया था।
संसद में क्या हुआ? लोकसभा में राहुल गांधी ने एक मैगजीन का लेख दिखाते हुए दावा किया कि किताब के अंश 100% असली हैं। जैसे ही उन्होंने चीनी घुसपैठ और टैंकों की स्थिति का जिक्र शुरू किया, स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें टोक दिया। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
प्रकाशन पर क्यों लगी है रोक? यह किताब मूल रूप से जनवरी 2024 में रिलीज होनी थी, लेकिन रक्षा मंत्रालय (MoD) इसकी सुरक्षा समीक्षा कर रहा है। मंत्रालय का मानना है कि इसमें कुछ संवेदनशील सैन्य जानकारियां हैं। अक्टूबर 2025 में एक कार्यक्रम के दौरान जनरल नरवणे ने किताब में हो रही देरी पर चुटकी लेते हुए कहा था, “यह पुरानी शराब की तरह है, जितना समय लगेगा, उतनी ही विंटेज और कीमती होगी।” फिलहाल, इस किताब को अभी तक एनओसी (NOC) नहीं मिला है।