रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में बालोद जिले में आयोजित स्काउट-गाइड रोवर रेंजर जंबूरी कार्यक्रम को लेकर तीखी बहस हुई। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने कार्यक्रम में हुए खर्च और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए। विपक्ष ने इस मामले में विधायकों की समिति से जांच कराने की मांग की, जिसे सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया।
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने टेंडर रद्द कर नया टेंडर जारी करने के कारणों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी विशेष व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों को डाउनग्रेड किया गया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया था। इस पर मंत्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि पुरानी शर्तें जटिल थीं, जिससे स्थानीय लोगों को अवसर नहीं मिल पा रहा था, इसलिए शर्तों में बदलाव किया गया। मंत्री ने जोर देकर कहा कि पूरी प्रक्रिया जेम पोर्टल के माध्यम से हुई है, जिसमें भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि स्काउट गाइड के अध्यक्ष पद को लेकर पहले ही विवाद चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर जारी होने से पहले ही काम शुरू हो गया था, जो नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
मंत्री गजेंद्र यादव ने सदन को जानकारी दी कि जंबूरी कार्यक्रम के लिए क्रॉसिंग एरिना, शौचालय, जल, प्रकाश, ध्वनि व्यवस्था, टेंट और भोजन सहित अन्य व्यवस्थाओं पर करीब दो करोड़ रुपये का खर्च आया है। उन्होंने बताया कि मेसर्स अमर भारत किराया भंडार को पांच करोड़ 18 लाख 88 हजार 860 रुपये का टेंडर आवंटित किया गया था। सरकार ने स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी और किसी विशेष फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाने संबंधी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।