नई दिल्ली, 30 मार्च 2026
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सल मुक्त भारत के विषय पर लोकसभा में हुई चर्चा का उत्तर देते हुए कांग्रेस पार्टी और वामपंथी विचारधारा पर तीखा प्रहार किया है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अब नक्सलवाद की समस्या से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में शुरू हुआ यह अभियान 2026 तक आते-आते अपनी तार्किक परिणति पर पहुँच गया है और अब देश के सभी 12 प्रभावित राज्यों से इस समस्या का अंत हो गया है।
सदन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद का विकास से कोई संबंध नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी विचारधारा है जो मानती है कि सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। उन्होंने कांग्रेस से प्रश्न किया कि देश पर 60 वर्षों तक शासन करने के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों में घर, पानी, स्कूल और बैंक जैसी बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुँच पाईं। गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में ही माओवादी विचारधारा का विस्तार हुआ और राजनीतिक स्वार्थ के कारण आदिवासियों को विकास से महरूम रखा गया।
बस्तर और रेड कॉरिडोर में विकास की नई किरण
गृह मंत्री ने जानकारी दी कि बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है और वहां के हर गांव में अब स्कूल निर्मित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण ही रेड कॉरिडोर में गरीबी आई थी, क्योंकि नक्सलियों ने आदिवासियों को शिक्षित होने से रोकने के लिए स्कूलों को निशाना बनाया था। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने इन क्षेत्रों में 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसके तहत 12500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण और 5000 मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं।
हथियार डालने वालों को अवसर, हिंसा करने वालों को कड़ा जवाब
अमित शाह ने नक्सलियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जो लोग हथियार डालेंगे, सरकार उनकी मदद करेगी, लेकिन जो सुरक्षा बलों पर गोली चलाएंगे, उन्हें उसी भाषा में उत्तर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में मुठभेड़ के दौरान 706 नक्सली मारे गए हैं, जबकि 2024 से 2026 के बीच 4839 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और 2208 नक्सलियों को जेल भेजा गया है। उन्होंने अर्बन नक्सलियों के दोहरे चरित्र की भी निंदा की और कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के बल पर ही इस समस्या का समाधान संभव हो पाया है।
शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि
चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले 5000 जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के बलिदान और जनता के सहयोग से ही आज भारत इस आंतरिक सुरक्षा की चुनौती से उबर पाया है। शाह ने अंत में दोहराया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है और संविधान को चुनौती देने वालों का हिसाब सुनिश्चित किया जाएगा।
