बेमेतरा। क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल शिव गंगा धाम सलधा में अध्यात्म और सेवा की नई धारा प्रवाहित होने जा रही है। रविवार को धाम के आश्रम प्रांगण में सलधा एवं आसपास के ग्रामीणों व सनातन धर्मावलंबियों की एक महत्वपूर्ण सामूहिक बैठक दंडी स्वामी श्री ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी महाराज के नेतृत्व में आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संवत 2083 में ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी सरस्वती के पावन ‘चातुर्मास व्रत अनुष्ठान’ को सपाद लक्षेश्वर धाम में संपन्न कराने हेतु रणनीति तैयार करना था।
बैठक में बनी योजना
पूज्य दण्डी स्वामी श्री मज्ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी महाराज की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा साझा की गई। उपस्थित ग्रामीणों और धर्मप्रेमियों से इस आयोजन की अवधि, ग्रामीण परिवेश में व्यवस्थाओं, आवास और सुगम आवागमन को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव लिए गए। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के समक्ष ‘अनुरोध पत्र’ प्रस्तुत कर उनकी सहमति और आशीर्वाद प्राप्त करेगा।
विश्व के ऐतिहासिक मंदिर निर्माण को मिलेगी गति
इस आयोजन का एक प्रमुख केंद्र बिंदु शिव गंगा धाम सलधा में निर्माणाधीन सवा लाख शिवलिंग मंदिर है। यह मंदिर अपनी अद्वितीय निर्माण शैली और ऐतिहासिकता के कारण भविष्य में विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाएगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि जगद्गुरु शंकराचार्य जी के सानिध्य में चातुर्मास होने से न केवल क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना जागेगी, बल्कि इस भव्य मंदिर के निर्माण कार्य को भी नई ऊर्जा और गति प्राप्त होगी।
महाशिवरात्रि पर्व पर विशेष चर्चा
बैठक के दौरान आगामी महाशिवरात्रि पर्व की तैयारियों और मंदिर के अधूरे कार्यों को पूर्ण करने के लिए सामूहिक सहयोग पर भी गंभीर चर्चा की गई। ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि शिव गंगा की पावन धरा पर इस ऐतिहासिक मंदिर को शीघ्र ही पूर्ण स्वरूप दिया जाएगा।
सलधा के ‘सपाद लक्षेश्वर धाम’ में चातुर्मास अनुष्ठान हेतु शंकराचार्य महाराज को सौंपा जाएगा आमंत्रण

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Mar