सरगांव/बिलासपुर। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री टांकराम वर्मा अपने विशेष दौरे के तहत सरगांव स्थित शासकीय महाविद्यालय पहुंचे। मंत्री के इस औचक प्रवास ने न केवल कॉलेज प्रशासन बल्कि स्थानीय राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। विशेष बात यह रही कि लगभग सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी उच्च स्तरीय जनप्रतिनिधि या मंत्री ने इस संस्थान की सुध ली है। इस दौरान उनके साथ विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
निरीक्षण और संवाद: “क्या चल रहा है और कैसे चल रहा है?”
महाविद्यालय परिसर पहुंचते ही उच्च शिक्षा मंत्री ने सीधे शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों का निरीक्षण शुरू किया। उन्होंने कॉलेज की पंजियों (Registers), मूलभूत सुविधाओं और चल रहे निर्माण कार्यों की बारीकी से जांच की। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने स्टाफ और छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया।
मंत्री ने पूछे तीखे सवाल:
निरीक्षण के दौरान मंत्री वर्मा ने कॉलेज प्रबंधन से दो टूक सवाल किए— “कॉलेज में कौन-कौन से पात्र (उपकरण/संसाधन) उपलब्ध हैं? पठन-पाठन की क्या स्थिति है और छात्रों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?” उन्होंने साफ तौर पर निर्देश दिए कि छात्रों की शिक्षा और सुविधा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सात वर्षों का सूखा और भविष्य की उम्मीद
स्थानीय लोगों और कॉलेज स्टाफ के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर रही कि सात वर्षों के लंबे समय के बाद कोई मंत्री स्तर का व्यक्ति यहां पहुंचा है। इससे पहले कॉलेज कई बुनियादी समस्याओं से जूझता रहा है। मंत्री के इस दौरे को सरगांव कॉलेज के कायाकल्प की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
प्रमुख बिंदु जिन पर रहा जोर:
संसाधनों की उपलब्धता: प्रयोगशाला और लाइब्रेरी में मौजूद संसाधनों की वर्तमान स्थिति।
अकादमिक गुणवत्ता: नियमित कक्षाओं का संचालन और प्राध्यापकों की उपस्थिति।
भविष्य की योजनाएं: कॉलेज के विस्तार और नए विषयों को शुरू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
उच्च शिक्षा मंत्री के इस दौरे से क्षेत्र के युवाओं में एक नई उम्मीद जगी है कि अब सरगांव कॉलेज की समस्याओं का त्वरित निराकरण होगा और इसे उच्च शिक्षा के एक बेहतर केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
सरगांव कॉलेज पहुंचे उच्च शिक्षा मंत्री टांकराम वर्मा: सात वर्षों बाद हुआ औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

30
Mar