इंदौर। शहर में लोगों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली पुलिस खुद सवालों के घेरे में है। मध्य प्रदेश एटीएस (ATS) ने इंदौर क्राइम ब्रांच के एक एएसआई और एक सिपाही को लोगों की गोपनीय कॉल डिटेल (CDR) बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई ने पूरे पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है।
कैसे खुला राज?
एटीएस की टीम एक प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी के संचालक की जांच कर रही थी। इसी दौरान कुछ संदिग्ध फोन नंबर सामने आए। जब कड़ियां जोड़ी गईं, तो इनका कनेक्शन सीधे पुलिसकर्मियों से निकला। पुख्ता सबूत मिलते ही एटीएस ने जाल बिछाया और दोनों को दबोच लिया।
भागने की फिराक में थे आरोपी
पकड़े गए आरोपियों में एएसआई राम और सिपाही रविंद्र शामिल हैं। बताया जा रहा है कि एएसआई राम गिरफ्तारी से बचने के लिए महाराष्ट्र भाग रहा था, लेकिन एटीएस ने टावर लोकेशन के जरिए उसे रास्ते में ही ट्रैक कर लिया। वहीं, सिपाही रविंद्र को उसके घर से हिरासत में लिया गया। फिलहाल दोनों से एटीएस मुख्यालय में कड़ी पूछताछ की जा रही है।
निजी जानकारी का काला कारोबार
शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये पुलिसकर्मी एक डिटेक्टिव एजेंसी के संचालक मुकेश तोमर के संपर्क में थे। शक है कि मोटी रकम के बदले ये लोगों की निजी बातचीत और लोकेशन का ब्योरा (CDR) बाहर लीक कर रहे थे।
बड़े नेटवर्क की आशंका
यह मामला सिर्फ दो पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं लग रहा है। एटीएस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह खेल कब से चल रहा था और इसमें विभाग के कौन-कौन से बड़े अफसर या बाहरी लोग शामिल हैं। आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।