नगरपालिका द्वारा व्यवसाय बंद कर गणतंत्र दिवस मनाने का तुगलकी आदेश का नगर में असर नहीं

दिलीप गुप्ता
सरायपाली :- नगरपालिका द्वारा गणतंत्र दिवस मनाए जाने हेतु पूर्व संध्या को सार्वजनिक तौर पर माइक से घोषणा करते हुवे 26 जनवरी को आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में अपना अपना व्यवसाय बंद कर शामिल होने की अपील की गई थी किंतु नगरपालिका के इस तुगलकी फरमान को ठेंगा दिखाते हुवे अपील को न मानते हुवे नगरवासियों व व्यवसायियों द्वारा पूर्व की तरह ही दुकान खुली रखी गई । इस तुगलकी फरमान की नगर में तीखी प्रतिक्रिया दिखाई दी । अनेक लोगों ने इसे अनावश्यक व जबरदस्ती निर्देश दिए जाने की बात कही ।


ज्ञातव्य हो कि वर्तमान नगर अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती पटेल दोबारा चुनाव जीत कर नपाध्यक्ष बनी हैं । इस चुनाव में यह सीट सामान्य महिला होने के कारण भाजपा में अनेक दावेदार अपनी दावेदारी ठोक रहे थे । अन्यों की दावेदारी को सुलझा लिया गया था किंतु संगम सेवा समिति के संस्थापक प्रखर अग्रवाल द्वारा लगातार दमदारी से दावेदारी किए जाने के कारण सरस्वती पटेल की दावेदारी को चुनौती मिल रही थी । सरस्वती पटेल की पुनः दावेदारी को देखते हुवे पार्टी के अंदर भी काफी विरोध था । प्रमुख दावेदार व भाजपाजन भी नहीं चाहते थे कि एक ही परिवार , एक ही समाज व एक ही वार्ड से एक ही व्यक्ति अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के लिए बार बार दावेदारी करे । इस नाराजगी का लाभ व समर्थन प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से प्रखर अग्रवाल को मिल रहा था । नगरवासी व आम जन भी लगातार पुराने चेहरों व भ्रष्टाचारी शैली से उकता गए थे वे एक नया व युवा चेहरा को देखना चाहते थे ।एक ही व्यक्ति व परिवार के बार बार दावेदारी से नगर में भी इसका अच्छा संदेश नहीं जा रहा था किंतु सामने कोई भी विरोध विभिन्न कारणों से नहीं कर पा रहा था पर अंदर ही अन्दर नाराजगी लोगों में थी । भाजपा परिवार वाद की घोर विरोधी रही है किंतु इसके बावजूद नगरपालिका चुनाव में परिवारवाद का ही बोलबाला चलता रहा ।
चारों तरफ से जब विरोध के स्वर उठने लगे तो पार्टी को भी सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा था जिसकी वजह से अध्यक्ष के नामों की घोषणा नामांकन तिथि के नजदीक आने के बावजूद नहीं की जा रही थी । अपने दावेदारी को कम व कमजोर होते देख वर्तमान अध्यक्ष पति द्वारा साम , दंड व भेद के साथ ही सभी तरह के हथकंडे अपनाए गए । अंततः प्रखर अग्रवाल को राजनैतिक व प्रशासनिक दबाव की बात कर व संगठन में अच्छे पद का लालच देकर उनकी दावेदारी को खत्म किया गया । हालाकि इस संभावना को प्रखर अग्रवाल द्वारा इनकार किया गया है । किंतु इस वास्तविकता से सभी परिचित है व यह नगर में चर्चा का भी विषय बना हुआ था । ठीक नामांकन के कुछ समय पूर्व सरस्वती पटेल के नाम की घोषणा की गई । बाद में काफी ताम झाम के साथ नामांकन दाखिल किया गया । प्रखर अग्रवाल के दावेदारी वापस लेने के बाद सरस्वती पटेल व भाजपा ने राहत की सांस ली थी । इसके बाद चुनाव में सीधे प्रत्यक्ष चुनाव में सरस्वती पटेल ने जीत दर्ज की थी ।हालाकि कांग्रेस पार्टी द्वारा जो प्रत्याशी मैदान में उतरा गया था गया था वह अपेक्षाकृत कमजोर साबित होने का लाभ भी भाजपा को मिला था । इसके बावजूद जब विजय हासिल हुई तो उसके बाद उनके व्यवहार व हावभाव में काफी परिवर्तन आ गया था । अहंकार साफ व स्पष्ट दिखाई दे रहा था। मनमाने पूर्ण निर्णय लेने , पार्टी की अनदेखी करने , पार्टी पदाधिकारियों से दूरी बनाने जैसी शिकायतें स्वयं पार्टी के भीतर चर्चा का विषय अभी भी बना हुआ है ।
इसी तानाशाही व तुगलकी सोच को देखते हुवे गणतंत्र दिवस मनाए जाने हेतु 25 जनवरी की शाम वाहन में माइक लगाकर नगर में घोषणा की गई कि सभी व्यवसायी अपनी अपनी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को बंद कर हाई स्कूल ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया गया। इस घोषणा के बाद अनेक व्यवसायियों ने नाराजगी व्यक्त करते हुवे बताया कि दुकान खुलने के पूर्व कुछ ऐसी दुकानें होती है जिन्हें एक दिन पूर्व ही तैयारी करनी होती है ठीक देर शाम इस तह की घोषणा से वे असहज महसूस करने लगे । खासकर होटल , ठेले वाले , सब्जी , फल व कच्चे मॉल के व्यवसायियों ने इस तरह बगैर किसी पूर्व सुचना के कुछ घंटे पूर्व इस तरह के आदेश का विरोध करते देखा गया । क्योंकि इस तरह दुकानों को बंद किए जाने से इन दुकानदारों को काफी नुकसान होता ।
नगरपालिका के इस अचानक रूप से किए गए घोषणा का दबी जुबान से अनेक नगरवासियों , व्यवसायियों , ठेलो , खोमचे, सब्जी , फल व होटल व्यवसायी विरोध करते नजर आए ।
इन सभी के परिणाम स्वरूप यह हुआ कि नगर की सभी दुकानें 26 जनवरी को देखते हुवे पूर्व समय के आधा घंटा पहले ही अनेक दुकानें खुलने लगी ।क्योंकि गणतंत्र दिवस व तीज त्योहार होने के कारण मिठाइयों , बूंदी , झंडा , तोरण आदि की आवश्यकता को देखते हुवे दुकानों में खरीदी के लिए भीड़ भाड़ रहती है । जिससे व्यवसाय अच्छा चलता है ।
ज्ञातव्य हो कि कुछ वर्ष पूर्व पूर्व नपाध्यक्ष स्व.वीरेंद्र सिंह द्वारा भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस तरह की घोषणा अपने कार्यकाल के दौरान की गई थी किंतु उनके कार्यकाल को नगरवासियों ने पसंद भी किया था उनके अच्छे निर्णयों व छवि के चलते नगरवासियों ने समर्थन करते हुवे कार्यक्रमो में व्यवसाय बंद कर शामिल भी होते थे । संभवतः इसी को आधार बनाते हुवे व अपनी हिटलरशाही रवैया को देखते हुवे इस तरह तुगलकी घोषणा की गई । किंतु वे भूल गए कि स्व.वीरेंद्र सिंह के स्वच्छ व पारदर्शी कार्यकाल के ये पास भी नहीं फटकते । इनके कार्यकाल को सिर्फ भ्रष्टाचार , अनियमितता , कमीशनखोरी , अपने चाटुकारों को लाभ पहुंचाने व अपारदर्शी कार्यशैली की छवि के रूप में पहचाना जाता है । विदित हो कि आज भी पूर्व नपाध्यक्ष स्व.वीरेंद्र सिंह परिवार के 2 लोग पार्षद हैं । दुखद यह है कि नगरपालिका में 5 पार्षद निर्दलीय वी 1पार्षद कांग्रेस का होने के बावजूद कभी भी किसी भी पार्षद ने विरोध स्वरूप कोई आवाज जनहित में भी उठाई ।
इस तरह नगरपालिका द्वारा कुछ घंटों पूर्व जारी तुगलकी आदेश को न मानते हुवे उन्हें उनकी जगह दिखाते हुवे पूर्व की तरह नगर के सभी व्यवसायियों ने अपनी अपनी दुकानें सामान्य तौर पर खोलकर उनके तुगलकी अपील का मुंहतोड़ जवाब दे दिया है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *