मंडला। जिले के मोहगांव प्रोजेक्ट अंतर्गत देवरी दादर डिपो में बुधवार दोपहर एक रूह कंपा देने वाला हादसा हो गया। लकड़ी की लोडिंग के दौरान भारी-भरकम लट्ठे की चपेट में आने से एक श्रमिक की जान चली गई। इस घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के मुताबिक, मोहगांव रैयत निवासी 55 वर्षीय छत्तर सिंह तेकाम डिपो में श्रमिक के रूप में कार्यरत थे। बुधवार को जब डिपो में लकड़ी के छठ्ठे (ढेर) को वाहन में लोड किया जा रहा था, तभी अचानक एक विशालकाय लकड़ी छत्तर सिंह के ऊपर गिर गई। भारी वजन के नीचे दबने से श्रमिक लहूलुहान हो गया और मौके पर ही चीख-पुकार मच गई।
इलाज में देरी और परिजनों का आक्रोश
हादसे के बाद विभाग के कर्मचारी घायल श्रमिक को आनन-फानन में अंजनियां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की खबर मिलते ही मृतक के परिजन अस्पताल पहुंचे, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।
परिजनों ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें सही जानकारी नहीं दी गई। परिजनों का दावा है कि हादसा रसईया दोन डिपो में हुआ था, जो मंडला के करीब है, लेकिन घायल को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाने के बजाय अंजनियां अस्पताल लाया गया। उनका आरोप है कि यदि समय पर सही इलाज मिलता, तो छत्तर सिंह की जान बच सकती थी।
पुलिस जांच और सुरक्षा पर सवाल
अंजनियां पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर मर्ग कायम कर लिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दे रही है, वहीं ग्रामीण और परिजन दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर वन विभाग के डिपो में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोल दी है।