रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1221 करोड़ 26 लाख 45 हजार रुपये की बजट मांगें प्रस्तुत कीं, जिसे सदन ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इस बजट का मुख्य उद्देश्य राज्य की न्याय व्यवस्था को आधुनिक, प्रभावी और सर्वसुलभ बनाना है।
न्यायिक अधोसंरचना और आधुनिकीकरण
विधि मंत्री ने बताया कि न्यायालय भवनों और न्यायिक अधिकारियों व कर्मचारियों के आवास निर्माण के लिए 88.63 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। न्यायालयों के कामकाज में तेजी लाने और उन्हें डिजिटल युग के अनुरूप बनाने के लिए कम्प्यूटरीकरण हेतु 15 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, उच्च न्यायालय बिलासपुर में व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए 100 नए पदों के सृजन हेतु 9 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
विधिक सहायता और सामाजिक न्याय
समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों को निःशुल्क न्याय दिलाने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरणों की योजनाओं हेतु 2.50 करोड़ रुपये रखे गए हैं। वर्ष 2025 में अब तक लगभग 95 हजार पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता दी जा चुकी है। इसके अलावा, ए.डी.आर. सेंटरों के निर्माण के लिए 2.40 करोड़ रुपये और आपराधिक मामलों में प्रभावी कानूनी सहायता के लिए एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
पदों का सृजन और नई अदालतें
न्याय प्रक्रिया को गति देने के लिए राज्य के विभिन्न जिला न्यायालयों में नए पदों का सृजन किया गया है। महासमुंद में 55, बिलासपुर में 18 और अन्य जिलों सहित कुल कई नए पद स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही, हर जिला न्यायालय में एक अनुवादक की नियुक्ति के लिए 23 पदों हेतु 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जगदलपुर में नई एन.आई.ए. कोर्ट की स्थापना के लिए भी एक करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
शिक्षा और अन्य प्रावधान
हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के स्थापना व्यय के लिए 13.50 करोड़ रुपये और छात्रों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शामिल होने के लिए एक करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है। विधि मंत्री के अनुसार, यह बजट न्यायिक ढांचे को मजबूत करने और अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम है।