माता के नव रूपो की झांकी निकली गई
भानुप्रतापपुर। श्रीमद देवी भागवत के सप्तम दिवस शुक्रवार को व्यासपीठ पर विराजमान
भागवताचार्य एवं ज्योतिषाचार्य
पंडित देवव्रत शास्त्री ने
मणिदीप दर्शन,अनन्त रूपो की कथा,देवी भागवत की चढ़ोत्तरी की कथा बताई गई। कथा श्रवण करने के लिए कथा पंडाल पर महिलाओं की भीड़ रही। माता दुर्गा के नवरूपो की झांकी निकली गई।

शास्त्री जी ने बताया कि हमे कल अच्छा बनाना है तो आज अच्छा काम करना चाहिए माता जी के मणिदीप देवताओ के स्थानों से भी श्रेठ है। जिसकी कल्पना भी नही किया जा सकता। उन्होंने कहा कि
ब्रह्मलोक के ऊपर स्थित रत्नों के दिव्य लोक ‘मणिद्वीप’ है, जहाँ आदिशक्ति जगदम्बा विराजमान हैं और सृष्टि का संचालन करती हैं; यह कथा साधकों को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति और परम शांति दिलाती है, जिसके श्रवण से आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं।
मणिद्वीप ज्योतिर्मय, रत्नों से सुशोभित दिव्य लोक है, जहाँ देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी (जगदम्बा) निवास करती हैं।
ब्रह्मा, विष्णु, और महेश जैसे देवता भी यहाँ आकर शक्ति प्राप्त करते हैं और ब्रह्मांड के कार्य करते हैं।
महाराज ने कहा की मणिद्वीप का चिंतन करने या वहाँ स्थान पाने से साधक जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर परम शांति (मोक्ष) प्राप्त करता है।