श्री शिव महापुराण का तीसरा दिन

कोरिया। सोनहत में चल रहे श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीधाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य श्री विनायकांत त्रिपाठी ने आज कामरति चरित्र, सती चरित्र और पार्वती चरित्र की मार्मिक कथाओं का वर्णन कर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। महादेव सेवा समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में दूर-दूर से आए सैकड़ों भक्तजन कथा सुनने के लिए उमड़ पड़े।

आचार्य श्री विनायकांत त्रिपाठी ने अपने ओजस्वी और मधुर वाणी में कामरति चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने का प्रयास किया और फिर उन्हें अपने कर्मों का फल भोगना पड़ा। उन्होंने समझाया कि भौतिक आकर्षण से ऊपर उठकर ही सच्ची भक्ति प्राप्त की जा सकती है। इसके पश्चात, उन्होंने सती चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार माता सती ने अपने पिता दक्ष प्रजापति द्वारा भगवान शिव के अपमान को सहन न कर पाने के कारण यज्ञ कुंड में आत्मदाह कर लिया। आचार्य जी ने सती के अटूट प्रेम, निष्ठा और आत्म-सम्मान की गाथा सुनाकर भक्तों की आंखें नम कर दीं। उन्होंने इस चरित्र के माध्यम से पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते और धर्म की महत्ता पर प्रकाश डाला। कथा के तीसरे खंड में, आचार्य त्रिपाठी ने पार्वती चरित्र का वर्णन किया, जो तपस्या, दृढ़ संकल्प और अनंत प्रेम की पराकाष्ठा है। उन्होंने समझाया कि किस प्रकार माता पार्वती ने कठिन तपस्या करके भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि पार्वती का चरित्र हमें सिखाता है कि सच्ची निष्ठा और अटूट विश्वास से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

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