नवरात्रि पर छत्तीसगढ़ की जेलों में आस्था का माहौल, हजारों बंदी कर रहे उपवास — पढ़िए पूरी खबर…

रमेश गुप्ता रायपुर। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ की सभी जेलों में धार्मिक आस्था और श्रद्धा का विशेष माहौल देखने को मिल रहा है। प्रदेशभर की जेलों में परिरुद्ध बंदियों को इस अवसर पर विशेष सुविधाएं प्रदान की गई हैं, जिससे वे अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उपवास एवं पूजा-अर्चना कर सकें।
जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य की विभिन्न जेलों में कुल 2397 बंदी नवरात्रि का उपवास कर रहे हैं। इनमें 2125 पुरुष बंदी और 272 महिला बंदी शामिल हैं। यह संख्या दर्शाती है कि जेलों के भीतर भी धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रति गहरी निष्ठा बनी हुई है।


संभागवार स्थिति
प्रदेश के अलग-अलग संभागों में उपवास रखने वाले बंदियों का विवरण इस प्रकार है—
रायपुर संभाग: 1140 बंदी (1070 पुरुष, 70 महिला)
दुर्ग संभाग: 243 बंदी (204 पुरुष, 39 महिला)
बिलासपुर संभाग: 407 बंदी (296 पुरुष, 111 महिला)
सरगुजा संभाग: 361 बंदी (336 पुरुष, 25 महिला)
बस्तर संभाग: 246 बंदी (219 पुरुष, 27 महिला)
जेलों में विशेष व्यवस्थाएं
नवरात्रि के दौरान उपवास रखने वाले बंदियों के लिए जेल प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। इसमें फलाहार, स्वच्छ पेयजल, पूजा-पाठ की सामग्री, साफ-सफाई और समयानुसार आरती एवं धार्मिक कार्यक्रमों की सुविधा शामिल है। कई जेलों में सामूहिक पूजा-अर्चना भी कराई जा रही है, जिससे बंदियों को मानसिक शांति और सकारात्मक वातावरण मिल सके।
डीजी जेल का बयान
इस संबंध में जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बताया—
“नवरात्रि के अवसर पर सभी जेलों में बंदियों की आस्था का पूरा सम्मान किया जा रहा है। उपवास रखने वाले बंदियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। हमारा प्रयास है कि जेल के भीतर भी उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता और सकारात्मक माहौल मिल सके, जिससे उनके मानसिक और आध्यात्मिक विकास में सहायता हो।”
सकारात्मक पहल
जेल विभाग की यह पहल बंदियों के सुधार और पुनर्वास की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से बंदियों में अनुशासन, आत्मचिंतन और मानसिक संतुलन विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
नवरात्रि के इस पावन पर्व पर जेलों के भीतर आस्था और अनुशासन का यह संगम समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश दे रहा है।

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