बढ़ रहा बुरी नजर से बचाने वाले उपायों का बाजार
रजकुमार मल
भाटापारा- जीत गया ‘ नजर बट्टू’। हार गया ‘एविल आई प्रोटेक्टर’। प्रवेश द्वार पर आधिपत्य को लेकर हुई इस जंग में जीत के बाद नजर बट्टू मुस्कुरा रहा है। पराजय के बावजूद खुश है एविल आई प्रोटेक्टर क्योंकि वॉल हैंगिंग के लिए पूरे परिसर की दीवारें, उसके लिए आरक्षित हो चुकीं हैं।
बढ़ती व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा अब पारंपरिक क्षेत्र में भी प्रवेश कर गई है। पहली बार इसे ऐसे क्षेत्र में देखा जा रहा है, जहां नींबू और मिर्च से बने ‘नजर बट्टू’ का अधिकार था। अब यहां मेटल से बने ‘एविल आई प्रोटेक्टर’ ने भी प्रवेश कर लिया है। दोनों के बीच मुकाबला दिलचस्प इसलिए हो चला है क्योंकि प्रवेश द्वार पर आधिपत्य को लेकर दोनों कोशिश कर रहे थे। मामला अब शांत होता इसलिए नजर आ रहा है क्योंकि पहले ने प्रवेश द्वार पर अपना आधिपत्य कायम रखा है तो दूसरे ने पूरे परिसर में अपनी मजबूत पहुंच बना ली है।

मुस्कुरा रहा ‘नजर बट्टू’
23 से 25 सेंटीमीटर लंबे धागे में तीन मिर्च ऊपर, मध्य भाग में नींबू और निचले हिस्से में चार मिर्च पिरोए जाते हैं। आम मान्यता है कि आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और बुरी नजर से बचाता है। यही वजह है कि इस ‘नजर बट्टू’ के नाम से पहचाना जाता है। मेटल से बने ‘एविल आई प्रोटेक्टर’ की पहुंच के बावजूद प्राकृतिक स्वरूप की प्राथमिकता कायम है।
खुश है ‘एविल आई प्रोटेक्टर’
प्रवेश द्वार पर आधिपत्य को लेकर हुई जंग में भले ही मेटल से बने ‘एविल आई प्रोटेक्टर’ की हार हुई हो लेकिन इस हार के बाद अब वह पूरे परिसर में नजर आने लगा है। हर दीवार पर उसे आकर्षक हैंडीक्राफ्ट के रूप में देखा जा रहा है। अध्ययन कक्ष हो या शयन कक्ष या फिर सभागार। हर कक्ष की दीवार पर इसकी मौजूदगी, बढ़ती स्वीकार्यता को सामने ला रही है। इसलिए खुश है ‘एविल आई प्रोटेक्टर’।

दोनों हर वक्त हाजिर
नींबू- मिर्च और धागे सहित अन्य सामान आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। या फिर शनिवार को बाजार से रेडीमेड भी खरीदे जा सकते हैं,10 से 15 रुपए में मिलने वाले यह ‘नजर बट्टू’। मनिहारी दुकानों और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म के जरिए मंगाए जा सकते हैं ‘एविल आई प्रोटेक्टर’। कीमत 100 से 300 रुपए इसलिए क्योंकि इसमें आकर्षक मुखौटे लगे होते हैं।