मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में गुरुवार को हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का उत्साह देखते ही बना। उज्जैन के क्षिप्रा तट से लेकर बुधनी के विजयासन देवी धाम तक, श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना और परंपराओं के साथ नए संवत्सर 2083 का स्वागत किया।
उज्जैन में क्षिप्रा तट पर उमड़ी श्रद्धा
हिंदू नववर्ष के अवसर पर उज्जैन में मां क्षिप्रा के पावन तट पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ ही विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मातृशक्ति ने शंखध्वनि के बीच गुड़ी सजाई और पुष्प, चंदन व इत्र से नववर्ष का अभिनंदन किया। श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को जल अर्घ्य अर्पित कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की। विद्वानों के अनुसार, यह दिन सृष्टि और नए कल्प के आरंभ का प्रतीक माना जाता है।
विजयासन देवी धाम में घट स्थापना
बुधनी स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विजयासन देवी मंदिर सलकनपुर में सुबह 10:47 बजे शुभ मुहूर्त में विधि-विधान के साथ घट स्थापना और ज्योति स्थापना की गई। इसी के साथ नौ दिवसीय नवरात्र पर्व की शुरुआत हो गई। यह दिव्य धाम प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहता है।
शाजापुर में मेले का शुभारंभ
शाजापुर के मां राजराजेश्वरी माता मंदिर में सुबह से ही भक्तों का जमावड़ा लगा रहा। यहां कलेक्टर ऋजू बाफना, पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह राजपूत और क्षेत्रीय विधायक अरुण भीमावद की मौजूदगी में घट स्थापना की गई। इसी के साथ जिले में 15 दिवसीय पारंपरिक मेले की भी शुरुआत हो गई है।
प्राचीन मंदिरों में विशेष श्रृंगार और परंपराएं
नरसिंहपुर के झोंतेश्वर में स्थित मां त्रिपुर सुंदरी का फूलों से भव्य श्रृंगार किया गया। मान्यता है कि यहां मां अपनी चौसठ योगिनियों के साथ विराजमान हैं। वहीं, शहडोल के अंतरा गांव में स्थित 10वीं शताब्दी के कंकाली माता मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने श्रीफल और लाल कपड़े बांधकर मन्नतें मांगीं।
सीहोर के मरही माता मंदिर में 250 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार नौ दिवसीय यज्ञ शुरू हुआ। यहां अष्टमी की रात 12 बजे निशा आरती की जाएगी और 27 मार्च को विशाल भंडारे का आयोजन होगा। धार में महाराजा भोज फाउंडेशन द्वारा किले की प्राचीर से सूर्यदेव को अर्घ्य दिया गया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए तुलसी के पौधों का वितरण किया गया।