मऊगंज (मध्यप्रदेश)। जिले के सिविल अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। मरीजों के इलाज के लिए बने इस अस्पताल में गंदगी, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और अव्यवस्थित स्वास्थ्य सेवाओं की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। शिकायतों के बाद डिप्टी कलेक्टर पवन गोरैया ने गुरुवार को अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिसमें कई खामियां उजागर हुईं।

अस्पताल में गंदगी और अव्यवस्था
निरीक्षण के दौरान अस्पताल के वार्डों में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब पाई गई। कई जगहों पर गंदगी फैली हुई थी और मरीजों के बिस्तरों पर चादरें तक उपलब्ध नहीं थीं। जानकारी के मुताबिक, पिछले करीब पांच महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण सफाई कर्मी हड़ताल पर हैं, जिसके चलते अस्पताल की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो गई है। वहीं आउटसोर्स कर्मचारी भी वेतन न मिलने से परेशान बताए जा रहे हैं।
ओपीडी समय में डॉक्टर अनुपस्थित
डिप्टी कलेक्टर के निरीक्षण के दौरान ओपीडी का समय होने के बावजूद कई डॉक्टर अपनी सीटों पर मौजूद नहीं मिले। बताया जा रहा है कि कुछ डॉक्टर अस्पताल में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते और हाजिरी रजिस्टर में औपचारिक हस्ताक्षर के जरिए उपस्थिति दर्ज की जाती है। इस मामले को लेकर भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।
अनुभवहीन कर्मचारी से कराए जा रहे एक्स-रे
अस्पताल में एक्स-रे की जिम्मेदारी एक आउटसोर्स कर्मचारी को दी गई है, जिसे इस कार्य का पर्याप्त अनुभव नहीं बताया जा रहा। इसे लेकर भी प्रशासन ने गंभीरता दिखाई है और संबंधित व्यवस्था की जांच की बात कही है।
मरीजों को नहीं मिल रही पर्याप्त सुविधाएं
अस्पताल में भर्ती मरीजों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं। मरीजों और उनके परिजनों ने भोजन व अन्य व्यवस्थाओं में कमी की शिकायत की है।
कर्मचारियों की शिकायतें भी सामने आईं
सफाई कर्मचारियों ने ठेकेदार पर पीएफ से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से भुगतान और अन्य सुविधाओं को लेकर समस्या बनी हुई है।
निरीक्षण के बाद डिप्टी कलेक्टर ने अस्पताल प्रबंधन से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है और व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।