रायपुर] छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले रायपुर एम्स (AIIMS) की बदहाली का मुद्दा अब देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद के गलियारों में गूँज उठा है। राज्यसभा में शून्यकाल (Zero Hour) के दौरान कांग्रेस सांसद फूलोदेवी नेताम ने अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया।”वक्त पर इलाज न मिलना, इलाज न देने के बराबर”सदन में अपनी बात रखते हुए सांसद नेताम ने कहा कि रायपुर एम्स में सुविधाओं का अभाव इतना अधिक है कि गंभीर मरीजों के लिए यहाँ का सफर ‘उम्मीद’ के बजाय ‘इंतजार’ बन गया है।

उन्होंने कड़े शब्दों में कहा— “यदि किसी मरीज को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलती, तो इसे इलाज देने से इनकार करने के समान ही माना जाना चाहिए।”आंकड़ों में रायपुर AIIMS की हकीकतसांसद ने सदन के पटल पर जो आंकड़े रखे, वे चौंकाने वाले हैं। अस्पताल प्रशासन और केंद्र सरकार के दावों के विपरीत, यहाँ स्वीकृत पदों और कार्यरत कर्मचारियों के बीच एक बड़ी खाई है:श्रेणीस्वीकृत पदकार्यरतरिक्त पद (खाली)चिकित्सक (Doctors)305190115नर्सिंग व अन्य स्टाफ3,8842,3871,497कुल रिक्तियां4,1892,5771,612सबसे ज्यादा प्रभावित विभाग: हृदय रोग (Cardiology), न्यूरोलॉजी और सर्जरी विभाग विशेषज्ञों की भारी कमी से जूझ रहे हैं।मरीजों की व्यथा: ‘बेड नहीं है’ का बोर्ड और लंबी कतारेंसांसद ने बयां किया कि स्टाफ की कमी का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है:लंबा इंतजार: ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ है, लेकिन डॉक्टर कम होने से जांच और ऑपरेशन के लिए महीनों की वेटिंग मिल रही है।बेड का संकट: गंभीर स्थिति में आने वाले मरीजों को अक्सर यह कहकर लौटा दिया जाता है कि “बेड खाली नहीं है”।जांच में देरी: तकनीकी स्टाफ की कमी से महत्वपूर्ण टेस्ट रिपोर्ट आने में भी देरी हो रही है।सांसद की सरकार से प्रमुख मांगें:रिक्त पड़े सभी 1,612 पदों पर तत्काल भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाए।अस्पताल में बिस्तरों (Beds) की संख्या में जल्द से जल्द इजाफा हो।कार्डियोलॉजी और न्यूरोलॉजी जैसे क्रिटिकल केयर विभागों को प्राथमिकता पर सुधारा जाए।निष्कर्ष: यह मुद्दा छत्तीसगढ़ के लाखों मरीजों के जीवन से जुड़ा है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस गंभीर संकट पर क्या ठोस कदम उठाती है।