सोंठी में बनने वाला ओवरब्रिज कहीं सक्ती शहर के लिए भारी न पड़ जाए: यू-आकार के ब्रिज की उठ रही मांग

सक्ती। लोकसभा चुनाव के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोंठी समपार और टेमर समपार में ओवरब्रिज बनाए जाने के लिए भूमि पूजन किया गया था। अब एक साल बाद इस दिशा में कार्य होता नजर आ रहा है। सोंठी समपार के लिए सोंठी फाटक से 500 मीटर की अधिक दूरी पर यू-आकार (U-Shape) का ब्रिज बनाने का कार्य शुरू हो गया है। साथ ही रेल विभाग के अधिकारी ब्रिज के क्षेत्र में आने वाले मकानों का लगातार सर्वे कर रहे हैं, ताकि अधिग्रहण की स्थिति में मुआवजा दिया जा सके।

दूसरी ओर, रेल लाइन के किनारे अपनी निजी जमीन पर घर बनाने वाले मालिकों में दहशत है कि कहीं उनके पुश्तैनी घर इस ओवरब्रिज की जद में न आ जाएं। टेमर समपार फाटक में भी ओवरब्रिज के लिए सर्वे का कार्य लंबे समय से चल रहा है। राजस्व विभाग द्वारा बेजा कब्जा हटाने के लिए फाटक के दोनों ओर 500-500 मीटर की दूरी पर स्थित ग्रामीणों को कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है, जिससे सड़क किनारे निवास करने वाले और दुकानदार काफी परेशान हैं।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की मांग: क्षेत्र के ग्रामीणों, ग्राम पंचायत सोंठी के पंच राम अवतार साहू और उप सरपंच मुकेश डेंसिल का कहना है कि जब सोंठी समपार के लिए यू-आकार के ब्रिज की बात आ रही है, तो टेमर समपार के लिए भी इसी तर्ज पर यू-आकार का ब्रिज बनाया जाना चाहिए। इससे किसी का घर नहीं टूटेगा और केवल कृषि भूमि का मुआवजा देकर सड़क बनाई जा सकती है।

ब्रिज के स्वरूप से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर असर: यदि टेमर समपार में सीधा ब्रिज बनाया जाता है, तो भारतीय खाद्य निगम (FCI) से चावल लेकर आने वाले ट्रक सक्ती शनि मंदिर से सोंठी होकर टेमर नवापाराकला के रास्ते रैक पॉइंट पहुंचेंगे। दूसरा रास्ता अग्रसेन चौक और अंबेडकर चौक से होकर सोंठी ओवरब्रिज का होगा। इन दोनों स्थितियों में सक्ती शहर की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा जाएगी।

सरपंच का सुझाव: सरपंच राखी अशोक यादव (ग्राम पंचायत सोंठी) का कहना है कि यदि रेल खंभा नंबर 634/10 AN के पास सोंठी फाटक के लिए बनाए जाने वाले यू-आकार के ब्रिज के साथ ही टेमर समपार के ब्रिज को जोड़कर इसे भी यू-आकार का बनाया जाता है, तो कार्य जल्दी पूरा होगा। इससे हैवी वाहन शहर के भीतर प्रवेश न करके बोईरडीह होकर सीधा रेलवे स्टेशन के रैक पॉइंट या राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच जाएंगे। इससे सक्ती शहर और सोंठी के नागरिकों का कम नुकसान होगा।

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