सुकमा। संघर्ष और चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले सुकमा जिले से अब बदलाव की एक नई तस्वीर उभरकर सामने आ रही है। जिले के वनांचलों में स्थित पोटाकेबिन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा दी जा रही है। यह पहल न केवल तकनीकी ज्ञान का प्रसार कर रही है, बल्कि पिछड़ेपन के साए में रहने वाले बच्चों के लिए नई उम्मीद भी लेकर आई है।
अब इन स्कूलों को आधुनिक तकनीक के केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां बच्चे कोडिंग, डेटा विश्लेषण और नवाचार के गुर सीख रहे हैं। विशेष बात यह है कि छात्र कृषि और मौसम से जुड़े स्थानीय मुद्दों के समाधान के लिए डिजिटल मॉडल भी तैयार कर रहे हैं। इस मुहिम को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने लाइवलीहुड कॉलेज में शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें उन्हें एआई, डिजिटल कंटेंट और प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण पद्धति सिखाई गई।
पोटाकेबिन स्कूलों में डिजिटल बोर्ड और स्मार्ट एप्स के माध्यम से पढ़ाई को रोचक बनाया जा रहा है। वैनिक सेरो संस्था के प्रशिक्षक बच्चों के मन से तकनीक का डर खत्म करने पर काम कर रहे हैं। यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एक बड़े वैचारिक बदलाव का संकेत है। अब सुकमा के वनांचलों में हथियारों की नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और विकास की भाषा सुनाई देने लगी है।