अन्नदाताओं की मेहनत पर डाला जा रहा डाका

जनधारा समाचार

सुरुंगदोह धान खरीदी केंद्र में खुला खेल—हर बोरी में 41.200 किलो से अधिक तौल, किसान खुलेआम लुट रहे

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कांकेर। एक ओर सरकार मंचों से अन्नदाताओं को देश की रीढ़ बताने के बड़े-बड़े दावे करती है, तो दूसरी ओर उन्हीं अन्नदाताओं की मेहनत और पसीने पर सरकारी धान खरीदी केंद्रों में खुलेआम डाका डाला जा रहा है। दुर्गूकोंदल विकासखंड के सुरुंगदोह धान खरीदी केंद्र में जो कुछ चल रहा है, वह न केवल किसानों के साथ सरासर अन्याय है, बल्कि पूरी धान खरीदी व्यवस्था की साख पर करारा तमाचा है। यहां किसानों से निर्धारित मानक से अधिक तौल कर धान लिया जा रहा है, जिससे उन्हें हर बोरी में सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब खुलेआम हो रहा है, लेकिन न तो जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंच रहे हैं और न ही किसी तरह की ठोस कार्रवाई होती दिखाई दे रही है।

मानक के नाम पर लूट, हर बोरी में बढ़ा दिया जा रहा वजन

जानकारी के अनुसार सुरुंगदोह धान खरीदी केंद्र में शासन द्वारा तय 40.600 किलोग्राम प्रति बोरी के मानक को ताक पर रख दिया गया है। किसानों का आरोप है कि उनसे प्रति बोरी 41.200 किलोग्राम से भी अधिक धान तौल कर लिया जा रहा है। यह अतिरिक्त तौल कोई तकनीकी गलती नहीं, बल्कि सुनियोजित लूट है। हर बोरी में लिया गया यह अतिरिक्त धान सीधे-सीधे किसानों की जेब से निकल रहा है, लेकिन मजबूरी में किसान इसे सहने को विवश हैं।

“विरोध किया तो धान नहीं लिया जाएगा”

किसानों का दर्द सिर्फ अतिरिक्त तौल तक सीमित नहीं है। ग्रामीण किसानों का कहना है कि यदि कोई किसान तौल पर सवाल उठाता है या विरोध करने की हिम्मत करता है, तो उसे अलग-अलग तरीकों से परेशान किया जाता है। कभी उसकी धान खरीदी में जानबूझकर देरी कर दी जाती है, तो कभी गुणवत्ता के नाम पर धान लौटा दी जाती है। कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि केंद्र में “चुप रहो और तौल दो” का माहौल बना दिया गया है। यही कारण है कि अन्नदाता अपने ही हक का हनन होते देख खामोश रहने को मजबूर हैं।

प्रशासनिक निगरानी पूरी तरह गायब

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन ने धान खरीदी केंद्रों की नियमित निगरानी और न्यायनिरीक्षण के स्पष्ट निर्देश जारी कर रखे हैं, तो फिर सुरुंगदोह केंद्र में यह लूट किसकी शह पर चल रही है? ग्रामीणों का आरोप है कि आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इस केंद्र का गंभीर निरीक्षण नहीं किया। न तहसील प्रशासन पहुंचा, न खाद्य विभाग और न ही सहकारी विभाग के अधिकारी। प्रशासन की यह चुप्पी संदेह को और गहरा करती है।

महाराष्ट्र से अवैध धान खपाने का गंभीर आरोप

मामला सिर्फ अतिरिक्त तौल तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार सुरुंगदोह धान खरीदी केंद्र के प्रभारी द्वारा महाराष्ट्र राज्य से अवैध रूप से धान लाकर खपाया जा रहा है। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह मामला साधारण अनियमितता नहीं, बल्कि एक बड़े अंतरराज्यीय घोटाले की ओर इशारा करता है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का लाभ राज्य के किसानों को देने के लिए व्यवस्था बनाई गई है, लेकिन बाहरी राज्यों का धान खपाना सीधे-सीधे शासन के साथ धोखाधड़ी है।

स्थानीय किसानों के हक पर डाका

महाराष्ट्र से अवैध धान खपाए जाने का सीधा असर स्थानीय किसानों पर पड़ रहा है। कई किसानों का कहना है कि उन्हें यह कहकर धान खरीदी से लौटा दिया जाता है कि “कोटा पूरा हो गया है”, जबकि उसी केंद्र में बाहरी धान आराम से खरीदा जा रहा है। इससे यह साफ हो जाता है कि पूरा खेल योजनाबद्ध तरीके से चल रहा है, जिसमें स्थानीय अन्नदाताओं के हक को नजरअंदाज किया जा रहा है।

कागजों में पारदर्शिता, जमीन पर सच्चाई कुछ और

सरकारी रिकॉर्ड में सब कुछ दुरुस्त दिखाया जा रहा है। वजन सही दर्शाया जा रहा है, किसानों के हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं और भुगतान की प्रक्रिया भी कागजों में पूरी दिखाई जाती है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान अतिरिक्त धान देकर भी अपने ही पैसे पाने को मजबूर हैं। यह पूरी व्यवस्था किसानों की मजबूरी का फायदा उठाने का जरिया बन चुकी है।

प्रशासन की चुप्पी, सवालों के घेरे में अधिकारी

इतने गंभीर आरोपों के बावजूद प्रशासन की खामोशी कई सवाल खड़े करती है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इस लूट की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़े घोटाले का रूप ले सकता है।

किसानों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

लगातार हो रही लूट से किसानों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सुरुंगदोह धान खरीदी केंद्र की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

एसडीएम का बयान: जांच और कार्रवाई का आश्वासन

भानुप्रतापपुर एसडीएम जीडी वाहिले ने इस पूरे मामले पर कहा कि मीडिया के माध्यम से उन्हें सुरुंगदोह धान खरीदी केंद्र में लापरवाही और निर्धारित मानक से अधिक तौल की जानकारी मिली है। उन्होंने संबंधित धान खरीदी केंद्र में जांच कर उचित कार्रवाई करने की बात कही है। एसडीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अन्य राज्य से धान खपाए जाने की पुष्टि होती है, तो इस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अब भी वक्त है, वरना भरोसा टूटेगा

धान खरीदी व्यवस्था किसानों और शासन के बीच भरोसे की सबसे मजबूत कड़ी मानी जाती है। यदि इस भरोसे को यूं ही तार-तार किया जाता रहा, तो आने वाले समय में किसान शासन की योजनाओं से मुंह मोड़ सकते हैं। सुरुंगदोह धान खरीदी केंद्र का मामला केवल एक केंद्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी है।

अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस खुली लूट पर कब लगाम कसता है, या फिर हर साल की तरह इस बार भी अन्नदाताओं की मेहनत पर डाका डालने वालों को खुली छूट मिलती रहेगी।

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