उदयपुर। सरगुजा जिले के थाना उदयपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पोतका में हुई एक अंधी हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। आपसी विवाद के चलते एक युवक की डंडा और टांगी के पासा से मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी सहित साक्ष्य छुपाने में मदद करने वाले उसके माता-पिता और रिश्तेदार को भी गिरफ्तार किया है।
शादी कार्यक्रम में गया था युवक, अगले दिन मिली लाश
मामले का विवरण देते हुए पुलिस ने बताया कि प्रार्थी मनोज कुमार ने 16 मार्च 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका छोटा भाई शीतल 15 मार्च को अपने साथी टेकराम के साथ ग्राम पोतका में एक शादी कार्यक्रम में शामिल होने गया था। अगले दिन सूचना मिली कि प्रमोद नामक युवक ने शीतल के साथ मारपीट की है और उसकी लाश पोतका पुलिया के पास एक डबरी (छोटा तालाब) में पड़ी है। मौके पर जाकर देखने पर मृतक के सिर पर गंभीर चोट के निशान मिले। पुलिस ने प्रार्थी की रिपोर्ट पर अपराध क्रमांक 50/26 धारा 103(1), 238(ए), 3(5) बी.एन.एस. के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।
हत्या के बाद खून साफ कर गोबर से की गई थी लिपाई
डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश कुमार अग्रवाल के निर्देशन में उदयपुर पुलिस ने जब मुख्य आरोपी प्रमोद सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो रूह कंपा देने वाला खुलासा हुआ। आरोपी ने बताया कि विवाद होने पर उसने शीतल के सिर पर डंडा और टांगी के पासा से हमला कर उसकी हत्या कर दी थी।
हत्या के बाद आरोपी प्रमोद ने अपने डेढ़साला राजेश कुमार के साथ मिलकर शव को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से डबरी में फेंक दिया। वहीं, आरोपी के पिता बहादुर और मां पवारों ने घर के भीतर गिरे खून को साफ किया और उस जगह को गोबर से लीप दिया ताकि किसी को शक न हो और सबूत मिट जाएं।
आरोपी गिरफ्तार, हथियार और साक्ष्य जब्त
पुलिस ने इस मामले में कुल 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है:
प्रमोद सिंह (20 वर्ष) – मुख्य आरोपी
राजेश कुमार (20 वर्ष) – शव फेंकने में मददगार (आरोपी का डेढ़साला)
बहादुर (42 वर्ष) – सबूत मिटाने वाला (आरोपी का पिता)
पवारों (40 वर्ष) – सबूत मिटाने वाली (आरोपी की मां)
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल डंडा, टांगी, मोटरसाइकिल और खून लगे कपड़े जब्त कर लिए हैं। घटनास्थल से जूट का बोरा, मोबाइल और गमछा भी बरामद किया गया है। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।
इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी उदयपुर निरीक्षक शिशिरकान्त सिंह, प्रधान आरक्षक संजय नागेश, राजेश चतुर्वेदी, आरक्षक रविन्द्र साहू, सूरजबली और देवेंद्र सिंह की सक्रिय भूमिका रही।