बाइकर्स गैंग का आतंक : खदानों से दिनदहाड़े उड़ा रहें काला सोना; जंगलों में हो रहा डंप , शासन को लग रही लाखों की चपत

हिंगोरा सिंह, : अम्बिकापुर/लखनपुर। सरगुजा जिले के लखनपुर और उदयपुर थाना क्षेत्रों में इन दिनों कोयला चोरों का बोलबाला है। इलाके की प्रमुख खदानों से कोयला चोरी करने के लिए ‘बाइकर्स गैंग’ सक्रिय हो गए हैं, जो बेखौफ होकर शासन को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस काले कारोबार में अब तक बड़े कोल माफियाओं के गिरेबान तक कानून के हाथ नहीं पहुँच पाए हैं।

अमेरा और रेहर खदानों पर ‘गिद्ध दृष्टि’
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अमेरा खुली खदान, रेहर भूमिगत खदान और गुमगरा खाल कचार से प्रतिदिन सैकड़ों बाइकर्स अवैध रूप से कोयला निकाल रहे हैं। ये बाइकर्स जान जोखिम में डालकर अपनी गाड़ियों पर कोयला लादकर खदानों से बाहर निकलते हैं और इसे आस-पास के चिमनी भट्ठों व गमला भट्ठों में खपा रहे हैं।

जंगलों में बन रहे ‘डंपिंग यार्ड’, फिर ट्रकों से अन्य राज्यों में सप्लाई
कोयला चोरी का यह खेल बेहद शातिर तरीके से खेला जा रहा है। बाइकर्स गैंग खदानों से कोयला निकालकर मुटकी, केवरी, बांसबाड़ी, सिरकोतगा, कटकोना, परसोडी कला और गुमगरा के घने जंगलों में एकत्रित करते हैं। यहाँ बड़े कोल माफियाओं द्वारा अवैध भंडारण (स्टॉक) किया जाता है। एक बार बड़ा स्टॉक जमा हो जाने के बाद, इसे टीपर, ट्रैक्टर और ट्रकों के माध्यम से दूसरे जिलों और अन्य प्रांतों में ऊँचे दामों पर बेच दिया जाता है।

इन गांवों में फैला है अवैध नेटवर्क
बाइकर्स गैंग की सक्रियता इतनी ज्यादा है कि कोयले की होम डिलीवरी जैसे हालात बन गए हैं। अम्बिकापुर, दरिमा, सपना सुकरी, गुमगरा, कटकोना, परसोडी, कटिंदा, बंधा, सिरकोटना, पुहपुटरा, केवरा, कोसगा, सकरिया, तुरना, तुनगुरी, जमगवा, टपरकेला और नवापारा जैसे दर्जनों गांवों में बाइक के जरिए चोरी का कोयला खुलेआम बेचा जा रहा है।

लीडर्स सुरक्षित, केवल प्यादे पकड़ में?
लखनपुर और उदयपुर क्षेत्र में करीब 5 से 6 सक्रिय बाइकर्स गैंग हैं, जिनके सरगना युवाओं को लालच देकर इस अवैध धंधे में धकेल रहे हैं। हालांकि पूर्व में लखनपुर पुलिस ने कुछ बाइकर्स पर कार्रवाई की थी, लेकिन असली ‘मास्टरमाइंड’ यानी कोल तस्कर अब भी पुलिस की पहुँच से बाहर हैं। जैसे ही प्रशासनिक कार्रवाई की भनक लगती है, बड़े तस्कर रफूचक्कर हो जाते हैं, जबकि छोटे बाइकर्स ही पुलिस के हाथ लगते हैं।

कार्रवाई के अभाव में बुलंद हौसले
दिनदहाड़े हो रही इस लूट से स्पष्ट है कि तस्करों के मन में कानून का डर खत्म हो चुका है। शासन को हर दिन लाखों की क्षति पहुँच रही है और पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। अब सवाल यह उठता है कि जिला प्रशासन और पुलिस विभाग इन बड़े कोल माफियाओं के खिलाफ कब कड़ी कार्रवाई करेगा?

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