मंदिर महासंघ जिला महासमुंद की बैठक अर्जुंडा धाम मंदिर में संपन्न

मंदिर बनेंगे सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक संवाद के सशक्त मंच, नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जोड़ने के लिए होंगे योजनाबद्ध प्रयास

0 अर्जुंडा धाम से उठी एकजुटता की आवाज अब क्षेत्र के मंदिरों में नई कार्यसंस्कृति, पारदर्शिता और सांस्कृतिक जागरण का आधार बनेगी।
दिलीप गुप्ता

सरायपाली=अर्जुंडा धाम परिसर में मंदिर महासंघ की आवश्यक बैठक आयोजित की गई, जिसमें मंदिरों के ट्रस्टी, समिति प्रमुख और पदाधिकारियों सहित सदस्य मौजूद रहे। बैठक में मंदिर व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण, पारदर्शिता और सांस्कृतिक जागरण को लेकर ठोस रणनीति पर मंथन किया। बैठक की अध्यक्षता प्रमुख संयोजक दाऊलाल चंद्राकर ने की। मंच पर पत्रकार और विचारक डॉ नीरज गजेंद्र के साथ नंदकुमार चंद्राकर और दानवीर शर्मा बागबाहरा, गोपाल शर्मा पिथौरा, डॉ. रमेश भोई बसना एवं राजेश मित्तल,सेवाशंकर अग्रवाल सराईपाली सहित कई प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया कि मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना के केंद्र न रहकर सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक संवाद के सशक्त मंच बनेंगे। विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि नई पीढ़ी को मंदिरों और सनातन संस्कृति से जोड़ने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाएं।

अध्यक्षीय उद्बोधन में दाऊलाल चंद्राकर ने कहा कि महासंघ की सबसे बड़ी शक्ति उसकी पारदर्शिता और सहभागिता होगी। उन्होंने उपस्थित सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने मंदिरों, समितियों और ट्रस्टों की समस्याओं, आवश्यकताओं और सुझावों को खुले मन से साझा करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मंच चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, ठोस कार्ययोजना और समन्वित कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ेगा।

डॉ. नीरज गजेंद्र ने मंदिरों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दस्तावेजीकृत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मंदिरों का इतिहास, परंपरा और सांस्कृतिक महत्व हमारी अमूल्य धरोहर है। यदि इसे व्यवस्थित रूप से संकलित और प्रचारित नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ी उससे वंचित रह सकती है। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि धारणा, विश्वास और छवि निर्माण का प्रभावी उपकरण है।

संयोजक मंडल के दानवीर शर्मा ने एकजुटता को महासंघ की असली ताकत बताते हुए कहा कि पहचान पदों से नहीं, सेवा से बनेगी। उन्होंने कहा कि मंदिरों में सेवा हो, सत्ता नहीं, मंदिर में आध्यात्मिक शांति के साथ सुव्यवस्थित और स्वच्छ वातावरण का अनुभव मिलना चाहिए,
सेवाशंकर अग्रवाल ने कहा कि पूरे जिले के मंदिर वे चाहे छोटा हो या बड़े हो सभी को अपने-अपने मंदिरों का रजिस्ट्रेशन करवा कर अपने-अपने संपत्ति को सुरक्षित करना चाहिए,जिससे मंदिरों का संरक्षण, संवर्धन, वित्तीय प्रबंधन हो सके,साथ ही साथ पूजा का घी (खाने योग्य नहीं) का प्रयोग आजकल पूजा पाठ में किया जा रहा है उस पर लोगों को विचार कर आम जनता और मंदिर वालो को इसका विरोध करना चाहिए,जिस घी को इंसान नहीं खा सकते उसको हम पूजा के लिए भी प्रयोग नहीं करें,इस तरह पूजा पाठ में साफ सफाई गुणवत्ता के ऊपर में भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई,बैठक का संचालन और आभार वरिष्ठ संयोजक आनंद गोयल ने किया।

बैठक को नुकेश चंद्राकर, ईश्वर सिन्हा, सब्यसांची पाणीग्रही, विजय शर्मा, अरुण शुक्ला, राजेश मित्तल दशरथी यदु श्रीमती राजकुमारी साहू, नितिन जैन, अनिता और अन्य सदस्यों ने भी संबोधित किया। सभी ने एक स्वर में महासंघ को विश्वास, सेवा और सामूहिक संकल्प का प्रतीक बनाने का आह्वान किया। वक्ताओं ने जोर दिया कि मंदिरों को जनभावनाओं का केंद्र बनाया जाना चाहिए। यहां से समाज को सकारात्मक संदेश और सांस्कृतिक दिशा मिले। डिजिटल युग की आवश्यकता को स्वीकारते हुए यह निर्णय लिया गया कि सोशल मीडिया का रचनात्मक और जिम्मेदार उपयोग कर मंदिरों की गतिविधियों, आयोजनों और सामाजिक पहलों को व्यापक समाज तक पहुँचाया जाए।

बैठक में ज्योतिष कानूनगो,राजू दास, मनोज दास, निखिल कानूनगो, नंदकिशोर रथ रोहित प्रधान दशरथी यदु श्रीमती राजकुमारी साहू नवीन अग्रवाल, रिंकू अग्रवाल मुरारी अग्रवाल नीलेश अग्रवाल अशोक अग्रवाल नमिता प्रधान , जितेन्द्र खोडियार, अनिता चौधरी, दीपक पटेल पुष्पेंद्र पटेल कन्हैया लाल पटेल राजकुमारी साहू पदमालया दास इंद्रजीत सलूजा तरुण सतपति दुखानासन प्रधान दिलीप कुमार, चतुर्भुज भोई, अभिषेक जैन, टेकलाल डड़सेना, बलराम कोसरिया, अभिषेक शुक्ला,चंद्रकांत भोई, किशोर सोनवानी, घनश्याम पटेल,आदि विशेष रूप से उपस्थित थे। बैठक में भोजन और अन्य सभी व्यवस्था श्री श्याम मंदिर समिति के द्वारा की गई थी,बैठक के उपरांत जिले के समस्त मंदिर के सदस्य गण श्री श्याम मंदिर अर्जुंडा,श्री दुर्गा मंदिर अर्जुंडा एवं श्री दुर्गा मंदिर सरायपाली एवं राधा माधव आश्रम बरडीह में पूजा अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया

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