ढाका। बांग्लादेश में 12 फरवरी को संपन्न हुए चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की बड़ी जीत के बाद तारिक रहमान मंगलवार, 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। नई सरकार के गठन से ठीक पहले उनके विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भारत के साथ संबंधों और गंगा जल संधि को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
कबीर ने स्पष्ट किया कि 1996 में हुई गंगा जल संधि को रिन्यू करने का फैसला बांग्लादेश अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर करेगा। दिसंबर 2024 में समाप्त हो रही इस संधि को लेकर उन्होंने कहा कि अब तक बांग्लादेश को भारतीय राज्यों के हितों का हवाला दिया जाता रहा है, लेकिन नई सरकार केवल अपने देश के हितों को प्राथमिकता देगी।
सांप्रदायिक मुद्दों पर भारत पर ही उठाए सवाल
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई बड़े पैमाने पर हिंसा और दीपू दास लिंचिंग जैसे मामलों पर सीधे जवाब देने के बजाय कबीर ने भारत के सामाजिक माहौल पर टिप्पणी की। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि भारत में बढ़ती कथित असहिष्णुता और कट्टरपंथी बयानबाजी बांग्लादेश के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने दावा किया कि भारत में कट्टरपंथ के सहारे चुनाव जीते जा रहे हैं, जबकि बांग्लादेश के लोगों ने ऐसी विचारधारा को नकार दिया है।
सीमा सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंध
हुमायूं कबीर ने सीमा पर होने वाली घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा की जाने वाली कार्रवाई और बांग्लादेशी नागरिकों की मौत जैसी घटनाएं दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। माना जा रहा है कि तारिक रहमान के कार्यभार संभालने के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच जल बंटवारे और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत का नया दौर शुरू होगा, जिसमें नई सरकार का रुख काफी कड़ा रह सकता है।