अंबिकापुर, 16 मार्च 2026। पिछले 08 मार्च को हम अंबिकापुर, जिला सरगुजा (छत्तीसगढ़) से पलामू जिला स्थित ग्राम ‘सुरगुजा’ के लिए एक ऐतिहासिक खोजी यात्रा पर निकल पड़े। शाम को जब सुरगुजा, पलामू (झारखंड) की भूमि पर हमारे पैर पड़े, तो मन आल्हादित और हर्षित हो उठा।
आप सभी को जानकर खुशी होगी कि जिस सुरगुजा की मैं बात कर रहा हूं, वह वही सुरगुजा है जो ईसा पूर्व मुंडाओं की ‘मानकी’ हुआ करती थी।

- यह वही सुरगुजा है, जिसने नागवंश के प्रथम राजा फणिमुकुट राय के चुनाव के समय अपनी सहमति दी थी।
- यह वही सरगुजा है, जहां के रक्सेल शासक ने बारहवीं सदी में छोटा नागपुर के नागवंशी शासक भीमकर्ण के ऊपर बारह हजार घुड़सवार व विशाल पैदल सेना के साथ हमला किया था।
- यह वही सुरगुजा है, जिसने चौदहवीं सदी में नागवंशी राजा छत्रकर्ण से कोरांबे युद्ध लड़ा था, जिसे ‘हल्दीघाटी का युद्ध’ भी कहा जाता है।
- यह वही सुरगुजा है, जहां पलामू राज्य के राजा मेदिनी राय ने सन् 1660 से 1666 तक शरण लिया था।
- यह वही सरगुजा है, जहां से रक्सेल राजा वर्तमान छत्तीसगढ़ आकर शासन करते रहे।
कहते हैं उनके वंशजों में वर्तमान टी.एस. सिंह देव (पूर्व उप मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन) और आदित्येश्वर शरण सिंह देव (जिला पंचायत उपाध्यक्ष) जन-जन में लोकप्रिय हैं।
आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़ राज्य 16 मार्च 2026

