◾सेवा के नाम से फोटो शेषन सिर्फ आत्म प्रचार के लिए होगा◾
◾ 3 मटकियों के पीछे बीस नामों का उल्लेख ◾
दिलीप गुप्ता सरायपाली :- जानकारी के अनुसार इस वर्ष गर्मी अधिक पड़ने की संभावना जताई जा रही है । प्रतिवर्षों के अनुसार इस वर्ष भी कुछ सामाजिक संघ व संगठनों द्वारा राहगीरों को शुद्ध व ठंडा पेयजल उपलब्ध कराने के नाम से आत्म प्रचार के लिए ढेर सारे प्याऊ घर खोले जायेंगे । 2-3 मटकी भरके अपने संगठन का बड़ा भारी बैनर लगाकर 4 लोगो को व स्वयं खड़े होकर सोशल मीडिया तथा अखबारों में समाचार प्रकाशित कर जोर शोर से आत्म प्रचार करेंगे फिर उसके कुछ ही घण्टो के बाद उक्त स्थलो में न मटकी दिखेगी न संस्था का कोई आदमी दिखेगा । मटकी रखे बालुओं में जानवरों को सोते व खाली पड़े मटकी पर कुत्तों को मलमूत्र करते देखा जाता है । यह ऐसे लोगों की यह कैसी मानव सेवा है ।

जैसे ही ग्रीष्म काल का समय आता है अनेक सामाजिक संगठनों द्वारा प्याऊ घर खोलने की जैसे प्रतियोगी बाढ़ आ जाती है । राहगीरों को शुद्ध व ठंडा पानी पिलाए जाने व राहगीरों के साथ प्यासे लोगो को गर्मी में पानी पिलाना सबसे बड़ा धर्म व पुण्य का कार्य माना जाता है । अनेक लोग स्वयं होकर निजी तौर पर अपने घरों व व्यवसायिक केंद्र के सामने ठंडा जल की व्यवस्था करते हैं तो वहीं अनेक लोग सार्वजनिक स्थलों पर सार्वजनिक व सामूहिक रूप से प्याऊ घर खोलते है । ऐसे सार्वजनिक प्याऊ घरों को बड़ा रूप देकर बालू बिछाकर उनमें 20-30 मटकियों को रखकर उन्हें लाल कपड़े से लपेटकर रखा जाता था ।

आयोजकों द्वारा यहां पर हमेशा 1-2 लोगों की पानी पिलाने की बाकायदा ड्यूटी लगाई जाती थी । कम से कम 2 से 3 महीनो तक यह व्यवस्था निरंतर चला करती थी किंतु समय के साथ श्रमिकों व स्थानों की कमियों के चलते इसका चलन लगभग समाप्त हो चुका है । अब कुछ सेवाभावी संस्थाओं द्वारा कुछ ही स्थानों पर कुछ ही दिनों के लिए यह व्यवस्था की जाने लगी है । नगर मे प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से विभिन्न कार्य हेतु राजस्व , बैंकों , पोस्ट ऑफिस , विभिन्न विभागो , सामान विक्रय किए जाने हेतु ग्रामीण जन नगर पहुंचते हैं पर किसी भी विभागों व अधिकांश व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में पक्षकारों व उपभोक्ताओं के लिए पेयजल की सुविधा नहीं है । इनके साथ छोटे छोटे बच्चों के अलावा महिलाओं की भी संख्या होती है ।
अनेक ग्रामीणजनो द्वारा नगर में हो रहे सार्वजनिक पेयजल की अनुलब्धता व उसके अभाव में इन लोगों व राहगीरों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जिसके चलते वे स्वयं डब्बों , पानी बोतलों व जरकिनो में घर से पानी लाना मजबूरी हो जाती है तो वहीं कभी कभी आवश्यकता पड़ने पर दुकानों से पानी बोतल खरीदकर पानी पीना पड़ता है । इसके साथ ही कही भी लघु शंका व मूत्रालय की भी कोई व्यवस्था नहीं होने से सर्वाधिक परेशानियों का सामना महिलाओं को झेलना पड़ता है ।नगर में नगरवासियों के साथ ही आगंतुकों को पेयजल व सौंदर्य प्रसाधन की सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर प्रशासन की जिम्मेदारी है । नगर के विभिन्न वार्डों में सार्वजनिक सौंदर्य प्रसाधन बनाए तो गये है पर कर्मचारियों व फंड की कमी के चलते अधिकांश सौंदर्य प्रसाधन केंद्र महीनों से बंद होकर क्षतिग्रस्त हो रहे है । भवनों की देखरेख के अभाव में करोड़ों रुपयों की लागत से निर्मित भवनें कमजोर व टूटफूट के कगार पर है ।
नगर मे बढ़ रही लगातार भीषण गर्मी व पेयजल की समस्याओं से हो रहे परेशान लोगों को देखते हुवे नगरपालिका द्वारा नगर मे कही भी पेयजल की व्यवस्था नहीं की है । नगरपालिका को चाहिए कि नगर के कुछ प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर सार्वजनिक पेयजल हेतु प्याऊ घर प्रारंभ करना चाहिए इससे सभी को लाभ मिल सकेगा ।विगत वर्षों तक नगर में कुछ सामाजिक संस्थाओं द्वारा सार्वजनिक प्याऊ घर प्रारंभ किया जाता था किंतु अभी तक नगर में कही भी प्याऊ घर प्रारंभ नहीं किया गया है । विगत दिनों भारत स्काउट गाइड की स्थानीय शाखा द्वारा 26 मार्च को राहगीरों की प्यास बुझाने के उद्देश्य बीईओ कार्यालय में बड़े ही धूमधाम से 3 मटकियों में पानी रखकर आत्म प्रचार हेतु फोटो शूट करते हुवे अखबार में समाचार भी प्रकाशित करवाया गया । बताया कि प्रदेश व जिला स्तर के पदाधिकारियों के निर्देश पर लगभग 20 नामों का उल्लेख करते हुवे प्याऊ घर खोला गया । स्काउट संघ द्वारा नाम दिया गया कि राहगीरों की प्यास बुझाने प्याऊ घर खोला गया राहगीरों की सुविधा के लिए प्याऊ घर खोला गया था तो इस प्याऊ घर को सड़क किनारे खोला जाना चाहिए था जिससे राहगीर देखकर पानी पी सकते थे पर आत्म प्रचार व प्रसार व दिखावे के लिए इसे बीईओ कार्यालय में खोला गया । यह स्थान सामूहिक नहीं बल्कि विभागीय टाइप था ।इस प्याऊ घर का जब दूसरे दिन निरीक्षण किया गया तो वहां कोई भी मटकी या बैनर नहीं था । पूरा सुनसान था । इस संबंध में जब स्काउट गाइड के एक पदाधिकारी से पूछा गया तो गलती को दबाने के लिए बाहरी लोगों द्वारा मटकी फोड दिए जाने का बहाना बनाया गया । पूर्व स्थल पर कुछ दिखाई ही नहीं दिया मटकी , गिलास व बेनर सभी गायब था । यहां सवाल यह उठता है कि यह कैसी सेवा है । सिर्फ यह खानापूर्ति , दिखावा व अपने उच्च अधिकारियों के आदेशो के पालन तक ही सीमित हो गया है ।कुछ सामाजिक संस्थाओं द्वारा सेवा भावना को देखते हुवे प्याऊ घर खोलने का कार्य किया जाता है जो निस्संदेह स्वागत योग्य व प्रशंसनीय है पर ऐसे सेवा भावना से कार्य करने वाले लोग व संस्थाओं की संख्या काफी कम होते जा रही है ।