सैन डिएगो, 11 अप्रैल 2026
नासा का ऐतिहासिक आर्टेमिस II मिशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा करने के बाद सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आए हैं। ओरियन स्पेसक्राफ्ट आज सुबह 5:37 बजे अमेरिका के सैन डिएगो तट के पास प्रशांत महासागर में उतरा। यह 54 वर्षों के बाद इंसानों को चंद्रमा के समीप ले जाने वाला पहला क्रूड मिशन है।
धरती के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग 6 मिनट के कम्युनिकेशन ब्लैकआउट का सामना करना पड़ा, जिस दौरान मिशन कंट्रोल से उनका संपर्क अस्थाई रूप से टूट गया था। ओरियन कैप्सूल पैराशूट की सहायता से समुद्र में सुरक्षित रूप से उतरा, जहां अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत यूएसएस जॉन पी. मुरथा (LPD 26) उनकी रिकवरी के लिए तैनात था।
इस मिशन में कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन शामिल थे। अंतरिक्ष यान ने ध्वनि की गति से 33 गुना अधिक रफ्तार से वायुमंडल में प्रवेश किया। वापसी के समय ओरियन कैप्सूल की हीट शील्ड ने हजारों डिग्री सेल्सियस तापमान को सहन कर अपनी मजबूती का सफल प्रदर्शन किया।
1 अप्रैल को फ्लोरिडा से लॉन्च हुए इस मिशन ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। हालांकि आर्टेमिस II चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरा, लेकिन इसने पृथ्वी से इंसानों द्वारा तय की गई सबसे लंबी दूरी का नया रिकॉर्ड बनाया है। चालक दल पृथ्वी से 2,52,756 मील (लगभग 4,06,771 किलोमीटर) की दूरी तक पहुंचा, जिसने अपोलो 13 के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
अपनी इस यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के दूरस्थ हिस्सों के दुर्लभ दृश्य देखे और पूर्ण सूर्य ग्रहण का भी अनुभव किया। यह मिशन चंद्रमा पर एक स्थायी बेस स्थापित करने की दिशा में नासा का एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। वर्तमान में रिकवरी टीम अंतरिक्ष यात्रियों को कैप्सूल से निकालकर शिप पर ले जाने की प्रक्रिया पूरी कर रही है।
