सुभाषपारा मैदान विवाद: “विकास के नाम पर सार्वजनिक मैदान को कैद क्यों कर रही भाजपा?”

भानुप्रतापपुर। नगर पंचायत भानुप्रतापपुर के सुभाषपारा मैदान को लेकर छिड़ा सियासी संग्राम अब आर-पार की जंग में तब्दील हो गया है। नगर पंचायत अध्यक्ष निखिल सिंह राठौर द्वारा कांग्रेस पर लगाए गए शिशु मंदिर एवं हिंदुत्व विरोधी’ और ‘विकास विरोधी’ आरोपों पर नेता प्रतिपक्ष विजय धमेचा समेत कांग्रेस पार्षदों ने ‘प्रेस नोट’ जारी कर तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस ने दो टूक कहा है कि अध्यक्ष महोदय अपनी विफलताओं और अपारदर्शी कार्यप्रणाली को छिपाने के लिए धर्म और जाति का सहारा लेकर असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटका रहे हैं।

“भूमिपूजन में जनता गायब, सिर्फ भाजपाई ही दिखे”

कांग्रेस ने बाउंड्रीवॉल के भूमिपूजन कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए इसे ‘पार्टी का इवेंट’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस मैदान के विकास का दावा किया जा रहा है, उसके भूमिपूजन में न तो मोहल्लेवासी मौजूद थे और न ही नगर के आम नागरिक। वहां केवल भारतीय जनता पार्टी के गिने-चुने और चिन्हित पदाधिकारी ही उपस्थित थे, जो साबित करता है कि यह कार्य जनहित में नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

मैदान को ‘कैद’ करने की साजिश का विरोध

नेता प्रतिपक्ष विजय धमेचा ने मैदान की उपयोगिता पर जोर देते हुए कहा:

“हम विकास के नहीं, बल्कि मैदान को घेर कर उसे आम जनता से छीनने के विरोधी हैं। बाउंड्रीवॉल बनने से शहर में होने वाले सामाजिक कार्यक्रमों और शादी-विवाह के लिए गरीबों को जगह की भारी किल्लत होगी। हम चाहते हैं कि पूर्व की तरह स्वीकृत 43 लाख रुपये का की मांग कर उसका उपयोग उपयोग मैदान के वास्तविक सौंदर्यीकरण के लिए हो, न कि इसे चारों तरफ से बंद करने के लिए।”

  • “हिंदुत्व पर हमें किसी के प्रमाण की जरूरत नहीं”

सरस्वती शिशु मंदिर और हिंदुत्व के प्रति ‘चिढ़’ वाले बयान पर कांग्रेस ने अध्यक्ष को आइना दिखाया। पार्षदों ने कहा कि नगर पंचायत के 10 में से 5 कांग्रेस पार्षद स्वयं सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र रहे हैं और आज भी कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बच्चे वहां शिक्षा ले रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व अध्यक्ष सुनील बबला पाढ़ी ने स्वयं इसी संस्था की मांग पर वॉटर कूलर लगवाया था। कांग्रेस ने स्पष्ट किया, “हम सनातनी हिंदू हैं और हमें अपनी आस्था का सर्टिफिकेट भाजपा से लेने की आवश्यकता नहीं है।”

भ्रष्टाचार और पारदर्शिता पर चुभते सवाल:

बजट का खेल: जब पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय 43 लाख रुपये का सौंदर्यीकरण प्रस्ताव स्वीकृत था, तो भाजपा सरकार आते ही उसे निरस्त क्यों किया गया?

गोपनीयता क्यों?: परिषद की बैठकों में राशि के आवंटन और बाउंड्रीवॉल के विशिष्ट कार्य की जानकारी पार्षदों से क्यों छिपाई गई?

अचानक भूमिपूजन क्यों?: बिना किसी सार्वजनिक चर्चा या वार्ड वासियों की सहमति के, रातों-रात भूमिपूजन की तैयारी करना क्या भ्रष्टाचार की ओर इशारा नहीं है?

कांग्रेसियों ने चेतावनी दी है कि यदि नगर की सार्वजनिक संपत्तियों को व्यक्तिगत या राजनीतिक स्वार्थ के लिए ‘कैद’ करने की कोशिश की गई, तो इसका सड़क से लेकर सदन तक पुरजोर विरोध किया जाएगा।

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