डिजिटल प्रशासन की ओर बढ़ते कदम: एमसीबी कलेक्ट्रेट में अधिकारियों को मिला स्पैरो और ई-ऑफिस का प्रशिक्षण

कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्पैरो-एपीएआर एवं ई-ऑफिस का कराया गया प्रशिक्षण
अधिकारियों-कर्मचारियों को ऑनलाइन मूल्यांकन और अचल संपत्ति विवरण की दी गई विस्तृत जानकारी

एमसीबी/23 फरवरी 2026/ जिला कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में आज सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा स्पैरो ( SMART PERFORMANCE APPRAISAL REPORT RECORDING ONLINE WINDOW ) तथा ई-ऑफिस प्रणाली पर आधारित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण की अध्यक्षता अपर कलेक्टर नम्रता डोंगरे ने की। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्पैरो-एपीएआर प्रक्रिया, ऑनलाइन कार्य निष्पादन मूल्यांकन प्रतिवेदन, वार्षिक अचल संपत्ति विवरण संधारण तथा सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग के प्रति व्यावहारिक रूप से दक्ष बनाना रहा। प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न कार्यालयों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर विनोद देवांगन एवं निखिल साहू के द्वारा बताया गया कि स्पैरो प्रणाली के अंतर्गत एपीएआर की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित होती है, जिसमें संरक्षक अथवा स्थापना अनुभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। स्थापना अनुभाग द्वारा मूल्यांकन की अवधि का चयन किया जाता है, सेवा नियंत्रण प्राधिकरण के रूप में डीएफएस का निर्धारण किया जाता है और संबंधित अधिकारियों को पीएआर भरने हेतु सक्षम किया जाता है। इसके पश्चात अधिकारी स्वयं अपने कार्यों का स्व-मूल्यांकन भरते हैं, जिसे रिपोर्टिंग प्राधिकारी द्वारा परीक्षण एवं टिप्पणी के बाद समीक्षा प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। अंतिम स्तर पर पुनः संरक्षक अथवा स्थापना अनुभाग द्वारा रिपोर्ट की जांच कर उसे सिस्टम में लॉक किया जाता है, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी एवं समयबद्ध बनती है।
प्रशिक्षण में बुनियादी शब्दावली को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। बताया गया कि कस्टोडियन या स्थापना प्रभारी वह अधिकारी होता है जो पूरे एपीएआर चक्र का तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रबंधन करता है। पीएआर, सीआर और एसीआर का तात्पर्य वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन प्रतिवेदन से है, जिसके आधार पर पदोन्नति, वेतनवृद्धि एवं सेवा लाभ निर्धारित होते हैं। इसी प्रकार आईपीआर अर्थात वार्षिक अचल संपत्ति विवरण संधारण को सेवा आचरण नियमों के तहत अनिवार्य बताया गया। एनआरसी की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया, जिसके अंतर्गत प्रतिवेदक, समीक्षक या स्वीकारकर्ता के सेवानिवृत्त होने की स्थिति में आवश्यक प्रमाण-पत्र जारी किए जाते हैं।
अधिकारियों को बताया गया कि विभिन्न संवर्गों के लिए अलग-अलग प्रपत्र निर्धारित हैं। फॉर्म-1 के अंतर्गत प्रथम, द्वितीय तथा कार्यपालिक तृतीय श्रेणी अधिकारियों का कार्य निष्पादन मूल्यांकन किया जाता है, फॉर्म-2 तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के लिए, प्रपत्र-3 शीघ्रलेखक संवर्ग जैसे निज सचिव, निज सहायक एवं शीघ्रलेखक के लिए तथा फॉर्म-4 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के मूल्यांकन हेतु उपयोग में लाया जाता है। प्रशिक्षकों ने उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि कोई तृतीय श्रेणी कर्मचारी समय पर फॉर्म-2 में अपना स्व-मूल्यांकन नहीं भरता है, तो उसकी एपीएआर प्रक्रिया अधूरी रह जाती है, जिससे भविष्य में पदोन्नति या अन्य सेवा लाभ प्रभावित हो सकते हैं।
तकनीकी सत्र में बताया गया कि एनआईसी नेटवर्क से जुड़े कार्यालयों के लिए स्पैरो पोर्टल का उपयोग epar.cg.gov.in के माध्यम से किया जाता है, जबकि अन्य नेटवर्क से कार्य करने के लिए saccess.nic.in के माध्यम से सुरक्षित लॉगिन की सुविधा उपलब्ध है। यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी लॉगिन और गतिविधियां राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के WebVPN पर लॉग होती हैं और अनधिकृत प्रवेश पूर्णतः निषिद्ध है। यदि saccess में लॉगिन के बाद भी कोई एप्लिकेशन या वेबसाइट कार्य नहीं कर रही हो, तो WebVPN टेस्ट विकल्प के माध्यम से समस्या की पहचान की जा सकती है और आवश्यकतानुसार संबंधित एप्लिकेशन प्रदाता से संपर्क किया जाना चाहिए।
ई-ऑफिस सत्र में परिचय ऑथेंटिकेटर, सुरक्षित लॉगिन, माय लॉगआउट, अंतिम लॉगिन समय जैसी सुविधाओं की जानकारी दी गई। उदाहरण के तौर पर बताया गया कि यदि किसी अधिकारी का अंतिम लॉगिन समय सिस्टम में दर्ज है, तो उससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि कार्य किस समय किया गया और सिस्टम सुरक्षा किस स्तर पर है। इससे फाइल मूवमेंट, नोटशीट और निर्णय प्रक्रिया पूरी तरह ट्रैक की जा सकती है।
आईपीआर विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया गया कि प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी सेवाओं के प्रत्येक सदस्य को निर्धारित तिथि तक अचल संपत्ति विवरण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होता है। इसमें अधिकारी का पूरा नाम, सेवा, कैडर और बैच, वर्तमान वेतन, संपत्ति का खसरा क्रमांक, गांव, शहर, जिला, संपत्ति का नाम एवं विवरण, निर्माण या अधिग्रहण की लागत, खरीद का वर्ष, यह संपत्ति किस माध्यम से प्राप्त हुई, वार्षिक आय तथा अन्य टिप्पणियाँ शामिल होती हैं। उदाहरण के रूप में बताया गया कि यदि किसी अधिकारी ने वर्ष 2018 में अपने पैतृक गाँव में भूमि खरीदी है, तो उसे खरीद की तिथि, लागत, विक्रेता का नाम और वर्तमान अनुमानित मूल्य भी स्पष्ट रूप से दर्शाना होगा। यदि सटीक मूल्यांकन संभव न हो, तो वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप अनुमानित मूल्य अंकित किया जा सकता है।
अपर कलेक्टर श्रीमती नम्रता डोंगरे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि स्पैरो और ई-ऑफिस जैसी डिजिटल प्रणालियाँ शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाती हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे निर्धारित समय-सीमा में एपीएआर और आईपीआर से संबंधित कार्य पूर्ण करें तथा किसी भी तकनीकी समस्या की स्थिति में समय रहते समाधान सुनिश्चित करें। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया और उन्हें भविष्य में भी डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।

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