नई दिल्ली। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत साधक को पापों से मुक्ति दिलाने और जीवन में सुख-शांति लाने वाला माना जाता है। इस वर्ष विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। शास्त्र सम्मत मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब इसका पारण विधि-विधान से द्वादशी तिथि को किया जाए।
तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से प्रारंभ होकर 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि की गणना के आधार पर व्रत 13 फरवरी को ही मान्य होगा। इस दिन सूर्योदय सुबह 07 बजकर 01 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 06 बजकर 10 मिनट पर होगा। पूजा के लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।
पारण का समय और विधि
विजया एकादशी व्रत का पारण 14 फरवरी 2026 को किया जाएगा। इसके लिए शुभ समय सुबह 07 बजकर 00 मिनट से 09 बजकर 14 मिनट तक निर्धारित है। पारण के दिन सुबह जल्दी स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु की प्रतिमा के सम्मुख दीपक जलाकर आरती करें। भगवान को सात्विक भोग लगाएं और फिर चरणामृत व तुलसी दल के साथ व्रत खोलें।
दान का महत्व
द्वादशी तिथि पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। व्रत के समापन के बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से आर्थिक संपन्नता आती है और जीवन के संकट दूर होते हैं।